यज्ञ के प्रकार

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येन सदनुष्ठानेन सम्पूर्णविश्वं कल्याणं भवेदाध्यात्मिकाधिदैविकाधिभौतिकतापत्रायोन्मूलनं सुकरं स्यात् तत् यज्ञपदामिधेयम्।

जिस सदनुष्ठान से सम्पूर्ण विश्व का कल्याण हो, तथा आध्यात्मिकआधिदैविक-आधिभौतिक तीनों तापों का उन्मूलन, सरल हो जाये, उसे यज्ञ कहते हैं।

येन सदनुष्ठानेन स्वर्गादिप्राप्तिः सुलभा स्यात् तत् यज्ञपदामिधेयम्।

जिस श्रेष्ठ अनुष्ठान से सुखविशिष्ट की प्राप्ति सहज हो जाये, वह यज्ञ है।

इज्यन्ते (पूज्यन्ते) देवा अनेनेति यज्ञः।

जिससे देवगण पूजे जाते हैं, वह यज्ञ है।

इज्यन्ते सम्पूजिताः तृप्तिमासाद्यन्ते देवा अत्रेति यज्ञः।

जिस कार्य में देवगण पूजित होकर तृप्त हों, उसे यज्ञ कहते हैं।

येन सदनुष्ठानेन इन्द्रप्रभृतयो देवाः सुप्रसन्नाः सुवृड्ढिं कुर्युस्तत् ...

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