पतंजलि योगपीठ (ट्रस्ट), दिव्ययोग मंदिर (ट्रस्ट):

उत्कृष्ट (प्रख्यात)अतीत (भूतपूर्वकाल)काल-एक आशाजनक भविष्यः-

पवित्र गंगा के पास धन्य भूमि पर कृपालु बाग आश्रम को विद्वत्तापूर्ण पंडित (बहुश्रुत) एवं देव साधित (सिद्ध)परम पूज्य स्वामी कृपालुदेव जी महाराज द्वारा वर्ष 19

History of Patanjali Yogpeeth

32 में बनाया

गया था। इस महन संघर्ष के साथ सहगामी, अन्य महान अध्यात्मवादी स्वामी श्रद्धानंद के साथ-साथ कृपालु देव जी, जोकि ‘गुरुकुल कांगड़ी’ के शुद्ध व पवित्र हिन्दुओं की परम्परा

के संस्थापक थे, ने पूर्वकालीन (मौलिक) भारतीय प्राचीन परम्पराओं के कायाकल्प (जीर्णोद्वार) के आंदोलन एवं इसके गौरवशाली एवं धवल अतीत के पुनरुद्वार (पुनर्जारण) संस्थापित किया, जिससे देश ने सदियों (शती) से उपेक्षा की जमीं धूल से आवरित अपने धर्म व सभी सम्बन्धित दृष्टिकोणों (पहलुओं) को पुनः अन्वेषित व इनका गुणगान किया। यह वह स्थान है जहाँ श्री रासबिहारी बोस जैसे महान देशभक्त ने स्वतंत्रता आंदोलनों के लिए अपने अभियानों के दौरान यहाँ आश्रय लिया था।

संत श्री कृपालु देव जी महाराज प्रसिद्ध शिष्य पूज्य स्वामी श्री शंकरदेव जी महाराज जोकि वैदिक ज्ञान के साथ सुपरिचित

(सुदक्ष) एवं कुलीन मानवीय महत्व के प्रबल समर्थक थे; के द्वारा सफलीभूत हुए। स्वामी जी ने अपने शिष्यों के समूह के साथ 1995 में न्यास (ट्रस्ट) की स्थापना

Divya Yog Mandir

की; अभी तक एक और परोपकारी पूज्य स्वामी रामदेव जी महाराज के सहभागी रहे, जिन्होंने निःस्वार्थ सेवा एवं शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्टता, वैदिक विद्या व राष्ट्रवाद की प्रोन्नति के लिए समर्पित अतिथि के आधार पर तेजोमंडल परम्परा को बढ़ाने के लिए अपनी उपस्थिति को समर्पित किया। वे सेवा की एक प्रबल मनोवृत्ति (जीवात्मा) के साथ एक ऊर्जावान

आत्मा द्वारा जुड़े, आचार्य बालकृष्ण जी महाराज, एक महान अध्यात्मवादी व आयुर्वेद के महान विद्वान एवं वैदिक दर्शन में एक स्थापित नाम भी है। स्वामी मुक्तानन्द जी महाराज विज्ञान स्नातक है एवं ये अन्य शिष्यों के साथ-साथ परम्पराओं की पदोन्नती (बढ़ाने)जारी रखने के लिये व्याकरणाचार्य एवं अपने गौरवशाली पूर्ववर्ती वर्षो में विश्वास प्रतिष्ठापित किया एवं हासिल किया। इसके साथ ही ये भविष्य को समृद्ध बनाने वाले प्रबल पुरुष है।