दृष्टिकोण उद्देश्य (लक्ष्य)

  • योग व आयुर्वेद के एक वैज्ञानिक दृष्टिकोण के माध्यम से एक रोगमुक्त विश्व बनाना।
  • हमारे महान संतों एवं ऋषियों अर्थात महर्षि पतंजलि, चरक एवं सुश्रुत के ज्ञान के आधार पर अनुसंधान कार्य के माध्यम से रोग एवं चिकित्सा से मुक्त एक नर्इ विश्व व्यवस्था बनाने के संकल्प को पूरा करने के लिए नये विश्व स्वास्थ्य संगठन की स्थापना करना।
  • प्राणायाम / योग पर अनुसंधान द्वारा सभी साध्य एवं असाध्य रोगों की चिकित्सा के लिए औषधि के रुप में प्राण को एक वैज्ञानिक दृष्टिकोण के साथ स्थापित करना।
    Visionary of Patanjali Yogpeeth

    Visionary of Patanjali Yogpeeth

  • आधुनिक चिकित्सा विज्ञान के मापदंडों के साथ अनुरुपता में गहन अनुसंधान के माध्यम से पृथ्वी के चारों ओर हुए रोगों की चिकित्सा के लिए ”मुक्त” औषधि के रुप में प्राणायाम को फैलाना, जिससे अमीर एवं गरीब सही स्वास्थ्य को प्राप्त करने के लिए क्रम में इसका लाभ उठा सकते है।
  • औषधियों एवं औजारों के घातक प्रभाव उन्मूलन के लिए यौगिक शैलियों का उपयोग करके विश्व को एक शांतिपूर्ण एवं स्वस्थ (शान्तचित्त) स्थान बनाना।
  • संस्थान के अनुसंधान केन्द्र पर योग एवं आयुर्वेद में अध्ययन व अनुसंधान के लिए संयोजन में यज्ञ, जैविक कृषि, गाय-मूत्र, प्रकृति एवं पर्यावरण के साथ जुड़े विषयों का अध्ययन एवं अनुसंधान करना।
  • असहनीय पीड़ा से पीडि़त रोगियों को पीड़ा कम करने एवं उनकी बीमारियों से मुक्त करने के लिए शल्य चिकित्सा एवं आपातकालीन मामलों, विषम चिकित्सा (एलोपैथी), सम चिकित्सा, यूनानी चिकित्सा एवं एक्यूप्रेशर (सूचीदाब) के लिए मुख्य रुप से योग एवं आयुर्वेद की तकनीकों से निहित चिकित्सा की एक नयी एकीकृत प्रणाली को बनाना।
  • एकमात्र भौतिक शरीर के उपचार के लिए चिकित्सा की वर्तमान अपूर्ण प्रणाली से परे भौतिक काय, आकाशीय काय की चिकित्सा की विधियों का मूल्यांकन करना।
  • योग व आयुर्वेद के शिक्षणों में डिग्री व डिप्लोमा पाठ्यक्रम शुरु करना।
  • योग व स्वास्थ्य शिक्षा प्रदान करने के अलावा, देश के विकास के लिए जाति, पंथ, वर्ग व धर्म की सीमाओं से परे अध्यात्मवाद, राष्ट्रवाद व न्याय के मूल्यों पर आधारित समानतावादी समाज की स्थापना करना।
  • नियमित व आवश्यक अभ्यास के रुप में योग को अपनाने के लिए प्रेरित करने पर शिक्षा, स्वास्थ्य, शक्ति, प्रशासन, उद्योग व व्यापार के विभागों में वातावरण (पर्यावरण) बनाना।
  • विश्व में गर्व के साथ रहने के लिए प्रत्येक नागरिक के प्रति एक वातावरण को प्रदान करने के लिए विश्व में मजबूत आर्थिक एवं सांस्कृतिक शक्ति के रुप में भारत को स्थापित करना।
  • योग के माध्यम से अब तक जाति, पंथ, वर्ग, धर्म, क्षेत्र, भ्रष्टाचार एवं हिंसा से स्वस्थ, मजबूत, समृद्ध एवं उन्नत भारत के सपने को साकार करना।
  • समाज के आर्थिक रुप से कमजोर वर्गो के लिए पूर्ण रुप से निःशुल्क निवास स्थान, भोजन एवं रहने का स्थान व निःशुल्क चिकित्सा उपलब्ध कराना।
    दिव्य योग मन्दिर (ट्रस्ट) के उद्देश्य
  • रोगों के उपचार एवं मस्तिष्क एवं शांत अवस्था व अत्यन्त प्रसन्नता प्राप्त करने पर नितान्त रोगों के अंत करने के लिए ऋषियों एवं मुनियों द्वारा प्रतिपादित प्राचीन परम्परा से प्राप्त अष्टांग योग, राज योग, ध्यान योग, हस्त योग, आसन व प्राणायाम इत्यादि के रुप में ट्रस्ट का मुख्य उद्देश्य व्यावहारिक (क्रियात्मक) प्रशिक्षण को प्रदान करना होगा।
  • उन लोगों, जो योग प्रशिक्षण एवं ध्यान में रुचि रखते है, के लिए रहने व भोजन की सुविधा के लिए इमारत आदि का निर्माण करना।
  • योग प्रशिक्षण एवं वैदिक धर्म के प्रचार करने के क्रम में देश एवं विदेश में योग शिविरों का आयोजन करना।
  • असहाय गरीब जातिच्युत (अजाति) की चिकित्सा के लिए धमार्थ चिकित्सालयों को खोलना व स्थापना करना एवं जनजातिय क्षेत्रों में निःशुल्क औषधियाँ, वस्त्र व खाद्य वस्तुओं को भी वितरित करना।
  • आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं के साथ धमार्थ चिकित्सालयों को तैयार व सुसज्जित करना।
  • योग, आयुर्वेद एवं वैदिक साहित्य पर अनुसंधान को सिद्ध करना एवं विद्वतापूर्ण परिसंवाद (संगोष्ठी) एवं प्रतियोगिताओं का भी आयोजन करना।
  • धर्मार्थ चिकित्सालयों, महाविद्यालय चिकित्सालयों, विद्यालयों एवं समाज व ट्रस्ट की यौगिक गतिविधियों के लिए आयुर्वेदिक औषधियों को बनाना एवं ब्रिकी करना व खरीदना।
  • नैतिक सांस्कृतिक उत्थान के चरित्र के निर्माण के प्रति वेदो, गीता, दर्शन शास्त्रों के अध्ययन के लिए एक विन्यास/ व्यवस्था बनाना।
  • साम्प्रदायिकता, जातिवाद व जाति व धर्म / पंथ की भावना को ऊपर रखने से इस पृथ्वी पर र्र्इष्या, घृणा, बुरार्इयों, अन्याय, अत्याचार एवं सुखद कारकों के उन्मूलन के लिए धर्मप्रचारकों को तैयार करना एवं इन्हें सरल करना व लोगों को संवेदनशील बनाना।
  • योग्य गरीब असहाय अनाथ छात्रों के लिए वस्त्रों, भोजन, अध्ययन सामग्री व निवास स्थान उपलब्ध कराने के निःशुल्क शिक्षा केन्द्रों को चलाना व उन तक यह सुविधा पहुँचाना।
  • उत्पीड़न व हत्याओं से इन नर्बिल गायों को बचाने के लिए अस्तबलों की स्थापना करना व इन्हें चलाना।
  • आधुनिक युग के पर्यावरणीय प्रदूषण की गंभीर समस्याओं को हल करने के क्रम में शोधों अथवा अग्निहोत्र का वहन करना व वैज्ञानिक यज्ञों को क्रियान्वित करना।
  • प्रशिक्षुओं जो कि साप्ताहिक, पाक्षिक, मासिक, त्रैमासिक व वार्षिक योग एवं एक्यूप्रेशर (सूचीदाब) प्रशिक्षण का कार्य का दायित्व लेते है, को पुरस्कार व प्रमाणपत्र दिया जाता है।
  • बाढ़, भूकम्प, महामारी सूखा इत्यादि से सम्बन्धित गतिविधियों में राहत प्रदान करने के लिये सहयता व सहयोग करना।
  • अन्य ऐसी संस्थाओं एवं संगठनों जिनका मेल अथवा लक्ष्य एवं उद्देश्यों व व्यवस्था, धन, भूमि इत्यादि के दान को स्वीकार करने के लिए इन लक्ष्यों व उद्देश्यों को पूरा करती हैं, को सहयोग देना।
    पतंजलि योगपीठ (ट्रस्ट) के उद्देश्य :
  1. अष्टांग योग, राजयोग, ध्यान योग, हस्त योग, आसन एवं प्राणायाम इत्यादि के माध्यम से हमारे पैतृक (प्राचीन) संतों से प्राप्त सभी व्यथाओं, शारीरिक बीमारी, मानसिक शांति एवं परमानंद की प्राप्ति के लिए पूर्ण उन्मूलन को हासिल करना। व्यावहारिक (क्रियात्मक) प्रशिक्षण देना जिससे कि अनुसंधान एवं चिकित्सा परीक्षणों को मन व शरीर पर योग के प्रभाव को किया जा सके एवं आधुनिक तकनीकों के प्रयोगों के द्वारा आयुर्वेद के प्राचीन विज्ञान का प्रसार किया जा सके। आयुर्वेदिक चिकित्सा के मध्यम से समृद्ध राष्ट्र के लिए एक रोग मुक्त समाज के निर्माण के द्वारा शोध व योग से सभी प्रकार के औषधीय एवं चिकित्सीय परीक्षणों को करना।
  2. बाहरी विश्व के माध्यम से योग आयुर्वेद शिविरों, सेमिनारों (परिसंवाद) एवं सभाओं का आयोजन व विज्ञापन करना। स्वदेशी भोजन, शुद्ध भोजन, जड़ी-बूटियों के माध्यम से स्वस्थ विश्व का निर्माण करना। आयुर्वेद में विकास व अनुसंधान के माध्यम से भारतीय संस्कृति का संरक्षण करना। हम सब विश्वभर में ट्रस्ट (न्यास) एवं शाखाओं का निर्माण कर रहे हैं। जिससे कि यह मिशन (लक्ष्य) विश्व के प्रत्येक नुक्कड़ व कोने में पहुँच जायेगा। हमें इन संगठनों जो कि इस क्षेत्र में वर्तमान में कार्य कर रहे है, के लिए स्वयं को सहभागी करना होगा, जिससे कि हम एक बैनर के तहत आगे बढ़ने के लिए सक्षम हो जायेंगे।
  3. प्राचीन कला पर आधारित सभी सुसाध्य व असाध्य रोगों, मानसिक रोगो के समाधान, प्राकृतिक चिकित्सा, एक्यूप्रेशर (सूचीदाब) व आयुर्वेद इत्यादि के लिए पूर्णतः आधुनिक अनुसंधान केन्द्र एवं चिकित्सा की सुविधाओं को बढ़ावा देना है। जिससे कि व्यथित मानव समाज चिकित्सा से अधिकतम सुख प्राप्त करेगा।
  4. असहाय, गरीब, दलित व वंचित लोगों व जनजाति क्षेत्रों के लिए निःशुल्क औषधि, वस्त्रों, खाद्य सामग्री इत्यादि को प्रदान करना एवं वितरित करना। आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं के साथ विशेष चिकित्सा शिविरों व चिकित्सालयों को खोलना।
  5. निःशुल्क व धार्मिक औषधालय विद्यालयों व ट्रस्टों (न्यासों) के योग व सामाजिक कर्तव्यों व सामाजिक गतिविधियों के लिए योग व आयुर्वेद पर शोध का संचालन करना एवं प्रदान करना। आयुर्वेदिक औषधि के निर्माण के लिए एक सुसज्जित औषधालय की स्थापना करना जिससे कि यह सार्वजनिक सेवा की गति बढ़ायेगा। औषधि की ब्रिक्री एवं खरीद करना। संगठन के लक्ष्य को पूरा करने के लिए सहकारी समिति (संस्था) से ऋण प्राप्त करना। शोध कार्य के लिए सबसे बड़ी प्रयोगशाला में से एक प्रयोगशाला का निर्माण करना।
  6. प्रजातियों की विभिन्न श्रेणियों के संरक्षण के माध्यम से हर्बल (जड़ी-बूटी सम्बन्धी) औषधियों के विभिन्न प्रकार को विकसित करना। इसके लिए औषधीय उद्यानों का संरक्षण, परिरक्षण एवं विभिन्न प्रकार होना। ग्रीन हाउस इत्यादि का निर्माण करना। एक सहकारी संस्था में हर्बल औषधि की पदोन्नति व संरक्षण हर्बल औषधियों की बुआर्इ के लिए किसानों द्वारा गठित किया जायेगा। रोजगार के अवसर पैदा करना एवं कृषकों की क्रय शक्ति को बढ़ाना एवं शुद्ध औषधियों के निर्माण के लिए खरीद का विक्रय करना।
  7. विश्व के कल्याण के लिए चरित्र निर्माण, नैतिक उत्थान व संस्कृति का ज्ञान, राष्ट्रीय गौरव का प्रबोधन, न्यायसंगत समाज, अध्ययन की व्यवस्था एवं वेद, गीता, दर्शन शास्त्र, उपनिषद, व्याकरण का शिक्षण करना। योग के विद्यार्थियों के लिए दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक, मासिक, त्रैमासिक एवं वार्षिक प्रशिक्षण प्रदान करना एवं उन्हें प्रमाण पत्र व पुरस्कार देना है। राष्ट्र के स्वस्थ व समृद्ध विकास के लिए व्यावसायिक रुप से उनकी सहायता करना। विश्व में भारतीय आध्यात्मिक ज्ञान का प्रसार करने के लिये संस्था संचालन व निर्माण करना।
  8. मौजूदा सामाजिक र्र्इष्या एवं घृणा, बुरे कर्मो, अश्लीलता, वैशिष्टयहीनता, अन्याय एवं अत्याचार समाप्त करना। योग को फैलाने के लिए आयुर्वेद देशभक्ति एवं धर्मप्रचारकों का सर्जन करना, जिससे कि वो पृथ्वी पर स्वर्ग बनाने के लिए साम्प्रदायिक असमानता, जाति, पंथ (धर्म) रंगभेद से ऊपर उठ सके।
  9. व्यक्तित्व विकास शिविरों, प्रदर्शनी, देश की व्यापक यात्रा, महान व्यक्तियों की वर्षगाँठों एवं माननीय मूल्यों, नैतिक उत्थान देशभक्ति पैदा करने के लिए विद्यार्थियों व शिक्षकों के लिए विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन करना।
  10. विभिन्न मासिक, पाक्षिक व वार्षिक पत्रिका का प्रकाशन करना एवं राष्ट्रवाद, अध्यात्म, योग, आयुर्वेद पर अनुसंधान पुस्तकों का लेखन व प्रकाशन करना एवं प्रकाशन, पुनर्मुद्रण, मूल लेखन, संकलन की व्यवस्था करना तथा आम जनता के बीच इन वैदिक प्राचीन ग्रंथ (लेख) का प्रसार करना। एक मुद्रणालय (मुद्रण यंत्र) को स्थापित करना।
  11. महिलाओं एवं 12 वर्ष की आयु से कम आयु के बच्चों के लिए ग्रामीण व पिछड़े क्षेत्रों में निःशुल्क शिक्षण संस्थान को खोलना। पाँच लाख से कम जनसंख्या के क्षेत्र में चिकित्सीय व अभियांत्रिकी संस्थान को खोलना। ऐसे क्षेत्रों में प्रशिक्षण व व्यावसायिक संस्थानों को खोलना। विकास के लिए रोजगार उन्मुख प्रशिक्षण संस्थानों की स्थापना करना एवं विशेष रुप से योग्य, शिक्षित बेरोजगार एवं असहाय लोगों के लिए औषधीय अध्ययनों पर आधारित योग व आयुर्वेद का संस्थापन करना जिससे कि वे विश्व के प्रत्येक नुक्कड़ एवं कोने में योग व आयुर्वेद, हर्बल औषधि के प्रसार के द्वारा औषधि मुक्त समाज के सपने को साकार कर सकते है।
  12. खाद्य सामग्री, वस्त्र, शिक्षण व छात्रावास सुविधाएँ प्रदान करना एवं गरीब, असहाय व वंचित छात्रों के लिए शिक्षण केन्द्रों का संगठन करना। योग्य व गरीब विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति प्रदान करना जिससे कि उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया जा सके।
  13. संहार (पशुवध)से नर्बिल गायों के रक्षण व संरक्षण के लिए गौ के आश्रय स्थलों को स्थापित करना। गायों को रखने व इनकी नस्ल को विकसित करने के लिए लोगों को प्रोत्साहित करना। स्वास्थ्य की आवश्यकता के लिए दही, घी, गौमूत्र, गौ का गोबर पर औषधीय अनुसंधान का संचालन करना।
  14. बाढ़, भूकम्प, भूखमरी इत्यादि के दौरान राहत कार्यो में लोगों की सहायता करना एवं आधारिक संरचना के लिए पूर्णरुप से औषधीय सुविधाओं व मौद्रिक (आर्थिक) संसाधनों को निःशुल्क प्रदान करना।
  15. अग्निहोत्र पर शोध करने एवं शरीर पर प्रदूषण के उन्मूलन के लिए वैज्ञानिक यज्ञ को निष्पादित करना।
  16. विशेषरुप से ग्रामीण क्षेत्रों में गैर पारंपरिक ऊर्जा जैसे कि बायोगैस सौर ऊर्जा, गोबर गैस के प्रयोगों पर शोध करना एवं इसका प्रसार करना।
  17. शिक्षा की ऐसी प्रणाली जिसमें भारतीय संस्कृति के साथ शिक्षा को सम्मिलित किया गया, को विकसित करने के लिए विद्यालयों की स्थापना करना जिससे राष्ट्र आर्थिक सामाजिक एवं आध्यात्मिक आवश्यकताओं का प्रयत्न रखना होगा एवं ऐेसे संस्थानों जो पहले से ही स्थित (मौजूद) हो, के साथ मिलकर कार्य करना।
  18. गौमूत्र, नीम, तुलसी के पत्रों एवं जड़ी-बूटियों से कीटनाशकों को बनाने (तैयार करने) के लिए तकनीको को (प्रौद्योगिकी) को विकसित करना। जिससे कि प्रदूषण एवं भूमि अनुर्वरता (बंध्यता) जो कि रासायनिक उर्वरकों व कीटनाशकों के कारण उत्पन्न होती हैं, से पर्यावरण की रक्षा कर सकते है। जैव कृषि, कृषि, वर्मी कम्पोस्ट (कृमिखाद) की ऐसी विधियों पर शोध करना जिससे कि जैव उर्वरकों का बड़े पैमाने पर प्रयोग किया जा सकता है।
  19. ग्रामीण क्षेत्रों में जल से वंचित क्षेत्रों में नलकूप सुविन्यस्त पाइप लाइन, पानी की टंकी का निर्माण करना। जल संसाधनों के संरक्षण व रक्षण पर शोध करना।
  20. महिलाओं व बच्चों के लिए ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाएँ उपलब्ध कराना। विशेष रुप से समाज के कमजोर वर्ग के लिए स्वास्थ्य की आवश्यकताओं एवं शिक्षा से सम्बन्धित लोगों को प्रबुद्ध करने के लिए विद्यालय का निर्माण करना।
  21. प्रदूषण हरियाली से छुटकारा प्राप्त करने के लिए राष्ट्रीय प्राकृतिक संसाधनों, जल, भूमि की उर्वरता को बढ़ाने, वृक्षारोपण के संरक्षण व रक्षण के लिए एक योजना को तैयार करना एवं लोगों को ऐसा करने के लिए जड़ी-बूटियों की बुआर्इ करना एवं जन आंदोलन करना।
  22. सैन्य पुरुषों के लिए एवं विशेषरुप से नर्बिल एवं गरीबों के प्रति पूर्ण मानवता के लिए रक्तकोष की स्थापना करना। रक्त परीक्षण शिविरों का आयोजन करना, रक्त उपलब्ध कराना एवं निःशुल्क रक्त दान के लिए समाज को प्रोत्साहित करना।
  23. विवाह योग्य गरीब एवं अनाथ लड़कियों के लिए सामूहिक विवाह का आयोजन करना एवं उनके लिए गृह स्थापित करने में सहायता करना। ऐसा करने में इस तरह के संगठन (संस्था) की सहायता करना।
  24. रोगमुक्त, भ्रष्टाचार मुक्त भारत की उपलब्धि के लक्ष्य के लिये योग साधना व प्रशिक्षण कार्य की प्रोन्नति के लिए विभिन्न मीडिया संगठन (मुद्रण अथवा इलेक्ट्रॉनिक), फैक्स मेल इत्यादि के लिए प्रोत्साहित करना।
  25. भारतीय पुरातत्व व प्राचीन धरोहर, पुरातत्व संग्रहालयों, पुस्तकालय इत्यादि का संग्रह एवं संरक्षण करना। प्रदर्शनी एवं ऐसे सभी कार्य जो कि संस्कृति की सुरक्षा के लिए आवश्यक हैं, का आयोजन करना।
  26. मूक पशुओं के संरक्षण के लिए एक योजना बनाना एवं ऐेसे पशुओं के रक्षित स्थानों, जहाँ वे स्वतंत्र रुप से घूम-फिर सकते है, के लिए कार्यक्रमों को बनाना। एवं सरकार व संगठन (संस्था), जो कि इस क्षेत्र में कार्यरत हैं, से सहायता के लिए प्रयास करना।
  27. आर्थिक रुप से समाज के कमजोर वर्ग के लिए निःशुल्क भोजन व गृह की व्यवस्था करना।
  28. इन लक्ष्यों को साकार करने के लिये कोषों, दान एवं उपहारों को स्वीकृत करने के लिए उत्थापन करना।