आचार्य बालकृष्ण जी

आचार्य बालकृष्ण जी :-आचार्य बालकृष्ण (जन्म 25 जुलार्इ, 1972) बहुआयामी व्यक्तित्व के धनी, आयुर्वेद में एक प्रसिद्ध (लोकप्रिय) सत्ताधारी (प्रभुत्व) एवं सुप्रसिद्ध औषधीय balkrishan_imgपादप विशेषज्ञ हैं। आप स्वामी रामदेव जी के सहभागी हैं जो कि विश्व में योग क्रान्ति के लिए विदित हैं एवं पतंजलि योगपीठ व दिव्य योग मंदिर (ट्रस्ट) की स्थापना के स्तम्भ हैं। आप एक ऐसे पुरुष हैं, जिन्होंने प्राचीन संतो की अध्यात्मिक परम्परा को विकसित किया हैं।

आचार्य बालकृष्ण एक सुप्रसिद्ध विद्धान व महान मार्गदर्शक हैं, जिनके मार्गदर्शन व नेतृत्व में आयुर्वेदिक उपचार व अनुसंधान ने नए आयामों को हुआ है। भारतवासी, आचार्य जी को आयुर्वेद प्रणाली को सशक्त करने वाली एक प्रतिभा के रुप में मानते है। उनके शिक्षाप्रद (शिक्षण), लेखन व शोध कार्यो ने लोगों को योग व आयुर्वेद के माध्यम से प्राकृतिक जीवन व अच्छे स्वास्थ्य को बनाये रखने के महत्व को आत्म एहसास के लिए प्रेरित किया। आचार्य जी का प्रसिद्ध टेलीविजन (दूरदर्शन) कार्यक्रम को औषधीय प्रयोजनों के लिए, पादपों के उपयोग में आम जनता (लोगों) की रुचि एवं आयुर्वेद में भी इनकी रुचि को विश्व स्तर पर जागृत करने के लिये कर्इ चैनलों पर प्रसारित किया गया है। उनके प्रयासों से एक वैश्विक स्तर पर साहित्य व चिकित्सा के क्षेत्र में उल्लेखनीय मानकों की स्थापना के साथ-साथ भारत के सामाजिक, सांस्कृतिक, शैक्षिक व आर्थिक अवस्थाओं के लिए महत्वपूर्ण योगदान मिला हैं।

जीवनी (जीवनवृत्तान्त):– अपने बाल्यकाल से ही गुरुकुलीय परम्परा में प्रशिक्षित व शिक्षित, श्रद्धेय आचार्य बालकृष्ण जी महाराज, क्रियात्मक महान पुरुष, एक बहुमुखी प्रतिभा के धनी व एक बहुआयामी व्यक्तित्व से धनी पुरुष हैं। वह महान दूरदर्शी (दिव्यदर्शी), अत्यधिक तपस्वी (आत्म संयमी), ऊर्जावान, मेहनती व बहुआयामी कौशल के साथ एक साधारण पुरुष हैं, जो कि निःस्वार्थ मानव जाति की सेवा में लगे हुए है इसके बावजूद गुरुकुलीय परम्परा में शिक्षित, श्रद्धेय आचार्य जी ने प्रबंधकीय प्रशासनिक व अभियांत्रिकीय क्षेत्रों में अपनी प्रतिभा को प्रदर्शित किया है। विश्व की अग्रणी हस्तियाँ उनसे मूल्यवान (महत्वपूर्ण) विषयों पर परामर्श व सलाह लेने के लिए तत्पर रहती है, व अवलोकन करती है। प्रसिद्ध पत्रिकाओं जैसेः-”इंडिया टुडे”(नवम्बर, वर्ष 2009) एवं ”आउटलुक” (जनवरी, वर्ष 2010) में इन्हे भारत के सर्वोच्च बहुमुखी व सक्रिय (ऊर्जस्वी) युवा पुरुषों के बीच गिना जाता है। वह महान संतो द्वारा स्थापित आयुर्वेद की शाश्वत परम्परा के एक प्रतिभाशाली प्रतिपादक हैं। वर्तमान (आधुनिक समय) में विश्व के मानचित्र पर आयुर्वेद की स्थापना व प्रचार का श्रेय इन्हें ही जाता है। इनकी देखरेख में विश्व भर में लगभग पाँच हजार ‘पतंजलि चिकित्सालय (औषधालय) एवं ‘आरोग्य केन्द्र’ (स्वास्थ्य देखभाल केन्द्र) चल रहे है। जो सर्वश्रेष्ठ उपचार व निःशुल्क परामर्श प्रदान करते है। एक हजार से अधिक वैद्यों को उनके मार्गदर्शन में प्रशिक्षित किया हैं एवं राष्ट्रीय व अन्तर्राष्ट्रीय स्तर अपनी सेवाएँ प्रदान कर रहे है। उन्होंने विभिन्न पुराने से जटिल रोगों से पीडि़त पाँच लाख से अधिक मरीजों का प्रत्यक्ष रुप से उपचार किया हैं। वे एड्स जैसे प्रतिरक्षात्मक विकारों के लिए विशेष सूत्रीकरणों (निरुपणों)को तैयार करने में balkrishan_img1निरन्तर लगे हुए है। आयुर्वेद के गहन ज्ञान के अलावा इन्हें औषधीय पादपों का भी अच्छा ज्ञान है। उन्हें औषधीय पादपों की विभिन्न दुलर्भ व लुप्तप्राय प्रजातियों के अभिज्ञान का श्रेय दिया गया है। उन्हें विभिन्न विषयों जैसे साहित्य, चिकित्सा, योग, भारतीय दर्शन, वेद, वैदिक संस्कृति, उपनिषदों व अनेक विषयों के बारे में एक विशेषज्ञता (दक्षता) व गहन तालमेल (ग्रहण-शक्ति) हैं। भारत, नेपाल, ब्रिटेन, अमेरिका, कनाड़ा व मॉरीशस में स्थापित पंतजलि योगपीठ व आयुर्वेद में चिकित्सा विज्ञान व अनुसंधान के संस्थान के संचालन के पीछे इन्हीं पुरुष के कार्य का कौशल है ये अंतर्राष्ट्रीय केन्द्र, सभी के लिये जोकि अध्यात्मिक रुप से चिकित्सा व प्राकृतिक विषाहरण उपचारों के इच्छुक है, के लिए अत्यधिक उत्साहित गंतव्य है। वे पतंजलि योगपीठ व दिव्य योग मंदिर (ट्रस्ट) के तहत सभी संगठनों के मुख्य वास्तुविद (स्थपति) है। भारत की वृहत खाद्य प्रसंस्करण इकार्इ ‘पतंजलि फूड एवं हर्बल उद्यान’ इनकी अभिनव दृष्टि (मौलिक परिकल्पना) का ही परिणाम है। वे अत्यधिक आधुनिक दिव्य फार्मेसी व पतंजलि एवं पतंजलि आयुर्वेद लिमिटेड के निर्माण के पीछे एक प्रेरणादायी स्रोत व अभिकल्पक (रुपांकक) है। पतंजलि जैव अनुसंधान संस्थान (पी.बी.आर.आर्इ) भी उनकी विचारधारा का भौतिकीकरण हैं जिसके उद्देश्य प्रकृति व पर्यावरण का संरक्षण करना एवं प्रदूषण मुक्त मृदा रखने के लिए जैविक कृषि के विकास पर अनुसंधान का संचालन करना है। विश्वस्तरीय, सुसंगठित, सुसज्जित चिकित्सालयों, योग भवन, प्रयोगशालाओं व अन्य आधारभूत संरचनाओं की स्थापना इनकी दूरदर्शी (दिव्यदर्शी) शक्ति व आत्मबल के उदाहरण है। इसके अलावा, वे पतंजलि विश्वविद्यालय, पतंजलि आयुर्वेद महाविद्यालय, आचार्यकुलम शिक्षण संस्थान एवं वैदिक गुरुकुलम के संस्थापक व समर्थक है। वे एक मार्गदर्शक व सलाहकार के रुप में गुरुकुल किशनगढ़-घासेड़ा, रेवाड़ी, हरियाणा को अपना परामर्श कार्य प्रदान कर रहे है। ये आवासीय शिक्षण संस्थान, सीबीएसर्इ पैटर्न (पाठ्यक्रम) के साथ मिश्रित अत्यन्त वैदिक शैली में पारम्परिक व आधुनिक शिक्षा के मिश्रण के साथ छात्रों को अच्छी शिक्षा प्रदान करने के साथ-साथ अच्छे नैतिक मूल्यों व स्वस्थ्य जीविका का वातावरण (पर्यावरण) देते है, एवं मेधावी व योग्य उम्मीदवारों, जो कि शिक्षा का खर्च वहन नही कर सकते हैं, के लिए निःशुल्क शिक्षा प्रदान करते है।

    वे मानवता व समाज सेवा के लिए उत्साह से पूर्ण दयालु (सहृदय) पुरुष हैं। वे सक्रिय रुप से आपदा प्रबन्धन कार्यक्रम में सहायता सामग्री प्रदान करने व पीडि़तों को राहत प्रदान करने में भागी रहे। पतंजलि योगपीठ ने सक्रिय रुप से सुनामी पीडि़तों (वर्ष 2009)के लिए सहायता प्रदान की। बिहार (वर्ष 2008)व उत्तराखण्ड (वर्ष 2013)में बाढ़ पीडि़तों को balkrishan_img2सहायता सामग्री व राहत प्रदान करने के लिए विश्व में ये वृहत गैर सरकारी संगठन के रुप में उभर (प्रकट) कर सामने आये। हाल ही में नेपाल में आये भूकम्प में वे सक्रिय रुप से राहत प्रदान करने में सम्मिलित हुए व अपने कार्यो को जाँच से हटाया तथा इनके कार्य के लिए इन्हें विभिन्न राष्ट्रीय व अन्तर्राष्ट्रीय संस्थाओं द्वारा सराहना दी गर्इ। पतंजलि योगपीठ ने वर्ष 2103 में उत्तराखण्ड में हुर्इ प्राकृतिक आपदा में पीडि़त बच्चों के लिए गुप्तकाशी के समीप नारायणकोटी में एक अनाथालय ‘पतंजलि सेवाश्रम’ की स्थापना की एवं नेपाल के भूकम्प त्रास्दी से पीडि़तों के लिए नेपाल में अनाथालय की स्थापना की। आवास व भोजन के साथ-साथ बच्चों को यहाँ पर निःशुल्क शिक्षा व व्यवसायिक प्रशिक्षण दिया जाता है।

    इनके मार्गदर्शन के तहत, ट्रस्ट (संस्था) ने निःशुल्क आवास व भोजन की सुविधा के साथ-साथ गरीब लोगों के लिए पतंजलि योगपीठ के समीप एक धर्मशाला ‘महर्षि बाल्मीकि धर्मशाला’ की स्थापना की। गरीब व अनाथ बालिकाओं के विवाह कार्य के लिए एक अलग कोष ‘पतंजलि मंगल निधि’ की स्थापना की गर्इ। आयुर्वेद व जैविक कृषि के क्षेत्र में उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए ‘पतंजलि आयुर्वेद गौरव’ एवं ‘पतंजलि कृषि गौरव’ के तहत आयुर्वेदिक चिकित्सों व कृषकों को पुरस्कृत किया जाता है। इन सभी गतिविधियों एवं प्रयासों से योग व आयुर्वेद की पारंपरिक विरासत के संरक्षण की दिशा में योगदान; औषधीय पादपों, जो इन दिनों तेजी से हो रहे विदोहन (शोषण) का सामना कर रहे है, का संरक्षण, समाज के उत्थान, बेरोजगारी उन्मूलन व प्राकृतिक जीवन के प्रति लोगों को प्रेरित करते हैं।

 

  • पदवियाँ [उपलब्धियाँ]:-वर्तमान में श्रद्धेय श्री आचार्य बालकृष्ण जी निम्न पदों को संभाले हुए है :-
  1. कुलपति, पतंजलि विश्वविद्यालय, हरिद्वार :-विश्वविद्यिालय द्वारा योग, आयुर्वेद, पंचकर्म, कम्प्यूटर विज्ञान इत्यादि पाठ्यक्रमों में डिग्री व डिप्लोमा एवं योग, आयुर्वेद, वैदिक विज्ञान, पारम्परिक चिकित्सक प्रणाली, दर्शन शास्त्र, अध्यात्मिक, संस्कृति व परम्परा, विश्व धरोहर (विरासत) आदि विषयों में पी.एच.डी. करवार्इ जाती है।
  • महासचिव सहसंस्थापक, दिव्य योग मंदिर (ट्रस्ट), हरिद्वार :

इस ट्रस्ट को समाज सेवा के उद्देश्य से 5 जनवरी, 1995 को स्थापित किया गया था। वर्तमान में यह बहिरंग रोगी विभाग, अंतरंग रेागी विभाग व औषधि विक्रय केन्द्र के साथ आयुर्वेदिक सेवाओ को प्रदान कर रहा है। इस ट्रस्ट के अन्तर्गत विभिन्न गतिविधियाँ सम्मिलित हैः-

  1. 1. दिव्य फार्मेसी :दिव्य फार्मेसी की एक वृहत व आधुनिक व्यवस्था, अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर जीएमपी, जीएलपी, आर्इएसओ, ओएचएसऐएस गुणवत्ता के नवीनतम मानकों के साथ इस ट्रस्ट के तहत कार्य कर रही है। यह देश मे महत्तम (सबसे बड़ी) आयुर्वेदिक औषधीय इकार्इयों में से एक इकार्इ है। यह प्राचीन आयुर्वेदिक ज्ञान व नवीनतम वैज्ञानिक तकनीकियों के अद्वितीय संयोजन के साथ उच्च्ा गुणवत्ता की आयुर्वेदिक औषधियों का विनिर्माण (उत्पादन) करती है।
  2. दिव्य प्रकाशन :-हिन्दी, अंग्रेजी व अन्य भारतीय भाषाओं में योग, आयुर्वेद, जड़ी-बूटी व औषधीय पादपों, रोगों व इनकी प्राकृतिक चिकित्सा, अध्यात्मिक, शोधन, देशभक्ति, दर्शन शास्त्र जैसी मानक पुस्तकों का प्रकाशन इस एक उन्नत प्रकाशन इकार्इ के तहत होता है।
  3. दिव्य योग साधना :योग चिकित्सा, आयुर्वेद, पवित्र मंत्रों, व धार्मिक संगीत, भक्ति व देशभक्ति, गीतों आदि के विषय में हिन्दी, अंग्रेजी व अन्य भारतीय भाषाओं में डीवीडी, एमपी-3, वीसीडी के जैसे ऑडियो-विडियो दृश्यों के विनिर्माण (उत्पादन) व वितरण का कार्य दिव्य योग साधना के द्वारा पूर्ण किया जाता है।
  4. दिव्य गौशाला :इस ट्रस्ट के अर्न्तगत दो गौशालाओं का निर्माण किया गया है, जहाँ उच्च नस्लों की गायों का औषधि के रुप में बहुमूल्य गौ उत्पादों को प्राप्त करने के लिए पालन पोषण किया जाता है।
  5. दिव्य नर्सरी यह इकार्इ संरक्षण, उत्पादन एवं औषधीय व सुगन्धित सजावटी व फलदार वृक्षों की बिक्री, जैविक खाद [वर्मीकम्पोस्ट (कृमि खाद)/ नीडैप]के उत्पादन व बिक्री से संबद्ध है।
  6. पतंजलि आयुर्वेदिक महाविद्यालय :-यह आसपास के क्षेत्र में एक पृथक परिसर हैं, जहाँ पतंजलि आयुर्वेद महाविद्यालय को चालू किया गया है।
  7. पतंजलि औषधीय उद्यान :यहाँ औषधीय पादपों को उगाया जाता है एवं इन पादपो पर वैज्ञानिक अनुसंधान को संचालित किया जाता है। लगभग 450 औषधीय पादपों को रोपित किया गया है, जिनमें दुलर्भ व उच्च तुंगता (समुद्रोच्छाय) वाले पादप भी सम्मिलित है।
  8. अन्य सुविधायें:व्याधिकी (पेथोलॉजी) व रेडियोलॉजी (विकिरण चिकित्सा) प्रयोगशालायें, आयुर्वेदिक उपचार सुविधायें, पंचकर्म व षड़कर्म (सत्कर्म) इकार्इयों, नेत्रविज्ञान विभाग, कर्णनासाकंठ विभाग, दन्त चिकित्सा विभाग, शल्य चिकित्सा विभाग, भौतिक चिकित्सा व एक्यूप्रेशर (सूचीदाब) अनुभाग व औषधि काउंटर इस ट्रस्ट के अन्तर्गत कार्यरत है।

(iii) महासचिव एवं सह संस्थापक, पतंजलि योगपीठ ट्रस्ट, हरिद्वार : ट्रस्ट की स्थापना का उद्देश्य योग व आयुर्वेद को विश्व के पटल पर प्रचार एवं प्रसार के लिए किया गया था। पतंजलि योगपीठ ट्रस्ट की दो इकाइयाँ योगपीठ फेज-1 और फेज-2 है। फेस-1 इकार्इ में कम से कम 500-1000 रोगियों का प्रतिदिन ओपीडी में निःशुल्क परामर्श व इलाज की सुविधा, पैथोलॉजी और रेडियोलॉजी विभाग, आयुर्वेद उपचार सुविधाएं, पंच-कर्म और षट्कर्म इकाइयाँ, नेत्र विज्ञान विभाग, नाक, कान व गला विभाग (र्इएनटी विभाग), दंत चिकित्सा विभाग, सर्जरी विभाग, नवीनतम मशीनों और उपकरणों से सुसज्जित फिजियोथैरेपी व एक्यूप्रेशर विभाग, चिकित्सा काउन्टर, आवास की सुविधा और योग अनुसंधान इकार्इ है। एक सर्फिंग, दर्शन, योग, आयुर्वेद और वनस्पति विज्ञान पर प्राचीनतम व नवीनतम साहित्य युक्त एक विशाल पुस्तकालय भी है। फेस-2 इकार्इ में एक विशाल वातानुकूलित योग सभागार, प्राणायाम और ध्यान का अभ्यास करने के लिए बनाया गया है। परिसर में एक विशाल भोजनालय और 3.13 वर्ग मीटर का क्षेत्र जहाँ 6000 से अधिक योग प्रतिभागियों के आवास, रुकने तथा योग सिखाने की सुविधाएं, 950 अतिथि कमरे, यज्ञशाला, 350 अपार्टमेंट और भ्रमण के लिए खुली जगह और बागान के साथ-साथ बहुत सारी सुविधाएं हैं। साथ ही में एक हर्बल उद्यान है, जहाँ मुख्य-मुख्य औषधीय पादपों का वृक्षारोपण किया गया है।     इस फाउंडेशन को विशेष रूप से योग और आयुर्वेद के क्षेत्र में वैज्ञानिक अनुसंधान को बढ़ावा देने के लिए स्थापित किया गया है। पतंजलि योगपीठ फेस-1 एवं फेस-2 की दो इकाइयों के पास अच्छी सुविधाओं के साथ ओपीडी में 500 रोगी / दिन की चिकित्सा के लिए अच्छी सुविधाएँ है, एवं आधुनिक मशीनों व यन्त्रों के साथ योग अनुसंधान केन्द्र सुसज्जित है। यहाँ आधुनिक वैज्ञानिक पद्धतियों द्वारा योग और ध्यान का शारीरिक क्रियाओं पर पड़ने वाले प्रभावों का अध्ययन एवं मूल्याकंन किया जाता है। रिसर्च फाउंडेशन जीव चिकित्सा अध्ययन, पारंपरिक चिकित्सा को पुनः सशक्त करने और आधुनिक प्रणाली के ज्ञान के साथ प्राचीन प्रणाली को पुनः स्थापित करने आदि क्षेत्रों में अनुसंधान कार्य कर रही है।

(a) योगग्राम :– प्राकृतिक उपचार के लिए एक अलग इकार्इ, योगग्राम को प्राकृतिक चिकित्सा में रोगी समग्र उपचार सुविधाओं के लिए भी स्थापित किया गया है। परिसर को प्रकृति के नर्मिल सौंदर्य के बीच बनाया गया है एवं इसे आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित किया गया है।

(b) आचार्यकुलमयह वैदिक गुरुकुल शिक्षण के मिश्रण एवं आधुनिक शिक्षण तकनीकों के साथ-साथ सी.बी.एस.र्इ./ एन.सी.र्इ.आर.टी पाठ्यक्रम व बच्चों ने अच्छे नैतिक मूल्यों को पराकाष्ठा तक पहुँचाने के लिए मानक शिक्षा प्रदान करने वाला आवासीय शिक्षण संस्थान है।

(iv) महासचिव सह संस्थापक, पतंजलि अनुसंधान संघः– इस फाउंडेशन को विशेष रूप से योग और आयुर्वेद के क्षेत्र में वैज्ञानिक अनुसंधान को बढ़ावा देने के लिए स्थापित किया गया है। यहाँ आधुनिक वैज्ञानिक पद्धतियों द्वारा योग और ध्यान का शारीरिक प्रक्रियाओं पर पड़ने वाले प्रभावों का अध्ययन एवं मूल्याकंन किया जाता है। रिसर्च फाउंडेशन जीव चिकित्सा अध्ययन, पारंपरिक चिकित्सा को पुनः सशक्त करने और आधुनिक प्रणाली के ज्ञान के साथ प्राचीन प्रणाली को पुनः स्थापित करने आदि क्षेत्रों में अनुसंधान कार्य कर रही है।

(v) महासचिव सह संस्थापक, पतंजलि ग्रामोद्योग ट्रस्ट :-इस ट्रस्ट को गांवों में गरीबी उन्मूलन, गांवों में महिलाओं को रोजगार, और आर्थिक गतिविधियों जैसे पशु-विज्ञान, खेती की प्रथाओं और हर्बल कृषि अनुसंधान संस्थान उत्तरकाशी आदि के माध्यम से जीवन स्तर में सुधार लाने के एकमात्र उद्देश्य के साथ स्थापित किया गया है। इन सब का मुख्य लक्ष्य और उद्देश्य गांवों में उपलब्ध संसाधनों और श्रम शक्ति का उपयोग पारंपरिक ज्ञान, कला और कौशल को व्यवस्थित और प्रबंधित कर एक उद्योग के रूप में स्थापित करना है। यह ट्रस्ट आपदा प्रबंधन व पीडि़तों को राहत और सहायता प्रदान करने के लिए भी काम करता है। आपदा प्रबंधन की गतिविधियों के तहत बाढ़ पीडि़तों को चिकित्सा, भोजन और कंबल आदि वितरण का कार्य तथा ग्रामीणों के सहयोग व एकता को बढ़ावा देने के लिए सौर प्रकाश, बायोगैस संयंत्र स्थापित करना, पादपों को लगाने और कृषक के क्लबों को बनाया गया है। इस संस्था के अंतर्गत औषधि वितरण, बाढ़ पीडि़तों के लिए भोजन व कम्बल; सौर ऊर्जा का आरोपण, बायोगैस संयन्त्र इत्यादि जैसी को आपदा शमन गतिविधियों को आरंभ किया गया है। कृषक संघ को एकता व ग्रामीणों के सहयोग के प्रोत्साहन के लिए बनाया गया है।

(vi) अध्यक्ष प्रबन्ध निदेशक, पतंजलि आयुर्वेद, हरिद्वार :-अत्याधुनिक मशीनों से सुसज्जित औद्योगिक इकार्इ, प्राचीन पारंपरिक और शास्त्रीय ज्ञान के साथ वैज्ञानिक ज्ञान का समावेश कर शुद्ध रूप से तैयार आयुर्वेद औषधियों को आम आदमी तक पहुँचाने का कार्य करती है। यह अंतराष्ट्रीय स्तर पर गुणवत्ता के नवीनतम मानकों (ळडच्ए ळस्च्ए ळच्च्ए प्ैव्ए व्भ्ै।ै) का पालन करती है।  प्राचीन ऋषियों द्वारा की गर्इ खोजों को नए शोध के साथ प्रस्तुत किया जाता है, ताकि दवाओं की गुणवत्ता को बरकरार रखते हुए रोगियों को अधिक से अधिक लाभ प्रदान किया जा सके।

(vii) प्रबन्ध निदेशक, पतंजलि जैव अनुसंधान संस्थान, हरिद्वार:-संस्थान जैव प्रौद्योगिकी अनुप्रयोगों के माध्यम से जैविक खेती के लिए नर्इ तकनीकों को विकसित करने में लगी हुर्इ है। कृषकों के लाभ के लिए कम कीमत पर बायोगैस संयंत्र, परिस्थिति के अनुकूल और कृषकों के अनुकूल जैव उर्वरकों के विकास के कार्य के साथ यहाँ उर्वरकों की गुणवत्ता के परीक्षण के लिए अच्छी प्रयोगशाला  उपलब्ध है।

(viii) योग सन्देश का मुख्य संपादक :– यह योग, आयुर्वेद, संस्कृति, जीवन सुधारने के उपाय आध्यात्मिकता के लेखों से युक्त एक मासिक पत्रिका है। 14 भाषाओं हिंदी, अंग्रेजी, गुजराती, मराठी, बंगाली, पंजाबी, उडि‌या, असमिया, तमिल, तेलुगु, मलयालम, कन्नड़, नेपाली और उर्दु सहित देश भर में तथा 25 अन्य देशों में वितरित की जा रही है। यह भारत और विदेश में डेढ़ लाख से अधिक लोगों द्वारा पढ़ी जाने वाली मासिक पत्रिका है।

(ix) प्रबन्ध निदेशकए वैदिक प्रसारण लिमिटेड रू. वैदिक प्रसारण के तहत आस्था चैनल, भारतीय संस्कृति और विरासत, स्वास्थ्य, आयुर्वेद, शिक्षा, योग, मूल्यों और नैतिकता, भक्ति गीत, आध्यात्मिक बैठकों, वार्ता, आदि के प्रचार का कार्य करता है। यह विशुद्ध रूप से एक गैर वाणिज्य चैनल है। इसकी अमेरिका, ब्रिटेन जैसे विभिन्न देशों में भी शाखाएं है।

(x) प्रबन्ध निदेशकए पतंजलि खाद्य हर्बल उद्यानए पदार्थाए हरिद्वारः– यह योग, आयुर्वेद, संस्कृति, जीवन सुधारने के उपाय आध्यात्मिकता के लेखों से युक्त एक मासिक पत्रिका है। 14 भाषाओं हिंदी, अंग्रेजी, गुजराती, मराठी, बंगाली, पंजाबी, उडि‌या, असमिया, तमिल, तेलुगु, मलयालम, कन्नड़, नेपाली और उर्दु सहित देश भर में तथा 25 अन्य देशों में वितरित की जा रही है। यह भारत और विदेश में डेढ़ लाख से अधिक लोगों द्वारा पढ़ी जाने वाली मासिक पत्रिका है। यह भारत का पहला और सबसे बड़ा खाद्य  उद्यान है, जहां पर विश्व की उच्च स्तर की मशीनरी द्वारा खाद्य उत्पादों का उत्पादन किया जा रहा है। यह खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय के सहयोग के साथ सरकारी योजना के तहत स्थापित दुनिया का सबसे बड़ा खाद्य एवं हर्बल उद्यान है। यह संस्थान 100 से अधिक विभिन्न खाद्य और हर्बल उत्पादों का उत्पादन जैसे कि आयुर्वेदिक दवाएं, खाद्य सामग्री आटा, दलिया, बेसन, मसाले, अचार, केन्डी, मुरब्बा आदि फलों के रस, और अन्य हर्बल पेय पदार्थ, जिनकी उत्पादन क्षमता 1500 टन प्रतिदिन से अधिक की है, करता है। यह खाद्य उद्यान खेती-बाड़ी पर निर्भर मजदूरों और किसानों को उनके उत्पादों के लिए उचित मूल्य दिलाने में सहायता करता है, एवं यह लोगों को हानि रहित व स्वस्थ उत्पादों को पहुँचाने का कार्य करता है।

आचार्य श्री के सभी प्रयास समाज का उत्थान और ग्रामीणों व असहाय लोगों की आर्थिक स्थिति व सामाजिक स्तर में सुधार के लिए होते हैं। इन सभी संगठनों से बेरोजगार लोगों के लिए अच्छे रोजगार के अवसर भी पैदा हुए है, जिससे क्षेत्र का विकास सामाजिक एवं आर्थिक रूप से हुआ है।

 औषधीय पादपों के विशेषज्ञता :

  1. संजीवनीअमरत्व की जड़ीबूटी :-इसकी दो पादप प्रजातियों सौसुरीया गॉसिपीफोरा व प्लूरोस्पर्मम कन्डोलार्इ को अभिज्ञानित किया गया था एवं इन्हें द्रोणागिरी पहाडि़यों में लगभग 15,000 फीट की ऊँचार्इ पर आचार्य श्री बालकृष्ण द्वारा प्रतिवेदित किया गया।
  2. अष्टवर्ग, अमरत्व की जड़ीबूटी :– अष्टवर्ग समूह के लगभग लुप्त व लुप्त प्रायः जड़ी-बूटियों को अभिज्ञानित किया गया एवं बहुत ही दुलर्भ व अष्टवर्ग जड़ी-बूटी की नर्इ किस्म, मेदा (पोलीगोनेटम वर्टीसिलेटम किस्म रुब्रम) सभी को इनके द्वारा प्रतिवेदित किया गया। ये जड़ी-बूटियाँ मसूरी, धनौल्टी व चम्बा (उत्तराखण्ड) एवं शिमला (हिमाचल प्रदेश) से लगभग 6,000 फीट की ऊँचार्इ पर पायी गयी।
  3. सोम, एक जीवन शक्तिवर्धक जड़ीबूटी :-एक अन्य पौधा, एफेड्रा मेजर (Ephedra major) पोषिता को इनके द्वारा अभिज्ञानित व प्रतिवेदित किया गया था।
  4. तेलिया कन्द, एक दिव्य जड़ीबूटीः– सॉरोमेटम वेनोसम; स्वर्णाक्षरी (यूफोर्बिया थॉमसोनियाना): एवं स्वर्णाद्रेका (जिंजीबर क्राइसेन्थम) को उत्तराखण्ड क्षेत्र से इनके द्वारा अभिज्ञानित व प्रतिवेदित किया गया था।

पुरस्कार, अभिनन्दन उपाधियाँ :– आचार्य बालकृष्ण जी को योग और आयुर्वेद के क्षेत्र में उनके योगदान और औषधीय पादपों की प्रजातियों की पहचान के विशेषज्ञता और विश्लेषण से उन औषधीय पादपों को विभिन्न रोगों के उपचार में इस्तेमाल करने के योगदान के कारण अनेक पुरस्कार, सम्मान और प्रमाण-पत्र प्राप्त हुए है। इनमें से कुछ निम्नलिखित हैः-

  1. भारत के पूर्व राष्ट्रपति डॉ अब्दुल कलाम द्वारा सम्मान 23 अक्टूबर 2004 को एक योग शिविर के दौरान राष्ट्रपति भवन में सम्मानित किया गया।
  2. भारतीय आयुर्वेदिक डॉक्टर अकादमी, कोलकाता द्वारा आयुर्वेदिक चिकित्सा विज्ञान के प्रति उनके योगदान के लिए जुलार्इ 2006 में सम्मानित किया गया।
  3. नेपाल के राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, मंत्रिमंडल की उपस्थिति में योग, संस्कृति और हिमालय की जड़ी-बूटियों के छिपे ज्ञान से दुनिया भर के लाखों रोगियों के चिकित्सा के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए सम्मानित किया गया। यह सम्मान अक्टूबर वर्ष 2007 में दिया गया।
  4. नेपाल संस्कृत विश्वविद्यालय द्वारा जून, वर्ष 2008 में सम्मानित किया गया।
  5. हृदय स्वास्थ्य पर कनाडाभारतीय नेटवर्क संस्था (CINS)’ द्वारा कनाडा में जून वर्ष 2010 में विश्वभर के नागरिकों के स्वास्थ्य खुशहाली और कल्याण हेतु तथा ‘योग और आयुर्वेद’ के मूल्यों को आगे बढ़ाने के लिए एक सम्मान दिया गया।
  6. भारतीय कृषि बागवानी संस्था, कोलकाता के द्वारा आयुष विभाग, भारत सरकार के सहयोग से उन्हें ”वनौषधिपंडित” की उपाधि दिसम्बर वर्ष 2010 में दी गर्इ। (हिंदुस्तान देहरादून संस्करण, रविवार, 26 दिसम्बर, 2010; और राष्ट्रीय सहारा, देहरादून संस्करण, रविवार, 26 दिसम्बर, 2010)
  7. एकीकरण आध्यात्मिकता व संगठनात्मक नेतृत्व संघ द्वारा वर्ष 2011 में लोगों को मानवता की ओर ले जाने के लिए ”मनोवृत्तियों व उद्यमिता पुरस्कार” से सम्मानित किया गया।
  8. योग्य व औषधीय पादपों के क्षेत्र में बहुमूल्य योगदान के लिए श्री वीरानजेनीया संघ, बंगारमक्की, कर्नाटक, (2012) द्वारा ”सुज्ञानश्री” पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
  9. मानवता व सामाजिक कार्यो के लिए अंतर्राष्टीय मानव मिलन संगठन, नर्इ दिल्ली (2013) द्वारा ”मानव रत्न” पुरुस्कार से सम्मानित किया गया।
  10. संस्कृत प्रसारण सभा, असम द्वारा नवंबर वर्ष 2013 में सम्मानित किया गया।
  11. गुजरात में 23 फरवरी वर्ष 2014 को आयोजित किये गये आयुर्वेद शिखर सम्मेलन में आयुर्वेद विशेषज्ञ के रुप में भारत के प्रधानमंत्री, श्री नरेन्द्र मोदी जी द्वारा सम्मानित व अभिनंदन किया गया।
  12. 8 जनवरी, वर्ष 2016 को आयुर्वेद के क्षेत्र में बहुमूल्य योगदान के लिए नर्इ दिल्ली में भारतीय अन्तराष्ट्रीय मित्रता संस्था द्वारा ”भारत गौरव पुरस्कार” से सम्मानित किया गया।

अनुसंधान प्रपत्र अधिकार पत्र– आचार्य बालकृष्ण के लेखक व सहलेखक के रुप में अनेक राष्ट्रीय व अन्तराष्ट्रीय पत्रिकाओं में अपने नाम से कर्इ शोध प्रपत्रों को प्रकाशित किया गया है। उन्होंने योग व आयुर्वेद पर अनेक अधिकार-पत्रों (पेटेंटो) को भी प्राप्त किया है।

सम्मेलनए परिसंवाद कार्यशालाएं :– इन्होंने 11 राष्ट्रीय व 3 अन्तराष्ट्रीय सम्मेलनों / परिसंवादों एवं कार्यशालाओं में भाग लिया है।

स्वास्थ्य सामाजिक रुपांतर (परिवर्तन) के लिए योग– वर्ष 2011 में पतंजलि योगपीठ, हरिद्वार में पतंजलि विश्वविद्यालय द्वारा प्रथम अन्तराष्ट्रीय सम्मेलन को आयोजित किया गया, जहाँ अन्तराष्ट्रीय योग विशेषज्ञों ने भाग लिया व इनकी नवीनतम शोध को प्रस्तुत किया गया।

पुस्तकों का लेखनए प्रकाशन संपादन– आचार्य बालकृष्ण जी ने ‘योग और आयुर्वेद’ के क्षेत्र में कर्इ पुस्तकें लिखी हैं और अप्रकाशित आयुर्वेदिक पांडुलिपियों के कर्इ शास्त्रों का संपादन किया है। वे योग सन्देश, योग आयुर्वेद, स्वास्थ्य, अध्यात्म और संस्कृति पर एक मासिक पत्रिका के मुख्य संपादक है। उन्होंनेे कर्इ पुस्तकों के संकलन और सम्पादन का कार्य किया है। उनके उत्कृष्ट कार्यों में से कुछ निम्नलिखित हैं।

वर्ष 2004

  1. दिव्य औषधीय, सुगन्धित एवं सौंदर्यकरण पादप– औषधीय व सजावटी पादपों पर इस पुस्तक को हिन्दी में संकलित किया गया है एवं इस पुस्तक के ये पूर्व प्रधान वैज्ञानिक व पादप आनुवांशिकी संसाधनों का राष्ट्रीय ब्यूरो (केन्द्र) के अध्यक्ष प्रोफेसर बी.डी.शर्मा के साथ सह-लेखक रह चुके है। इस पुस्तक को वर्ष 2004 प्रकाशित (विमोचन) किया गया था।

वर्ष 2005

  1. जीवन शक्ति वृद्धिकारक अष्टवर्ग पादप (जीवन शक्ति आयुवृद्धि विरोधी के लिए) एवं अष्टवर्ग रहस्य :– अष्टवर्ग आठ जीवन शक्ति के वृद्धिकारक व आयुर्वेद में वर्णित वृद्धावस्था विरोधी औषधीय गुणों से युक्त पादपों का एक समूह है। इस पुस्तक को वर्ष 2005 में प्रकाशित किया गया (हिन्दी व अंग्रेजी दोनों में) एवं ये इस पुस्तक के पूर्व प्रधान वैज्ञानिक व पादप आनुवांशिकी संसाधनों का राष्ट्रीय केन्द्र के अध्यक्ष, प्रोफेसर बी.डी.शर्मा के साथ सह-लेखक थे। यह पुस्तक एक लंबे समय से अभिनिर्धारित, अष्टावर्ग पादपों की पहचान से संबधित सभी संदेहों व अनिश्चितताओं को स्पष्ट करती है।

वर्ष 2006

  1. भक्ति गीतांजलि :– इस पुस्तक में प्रसिद्ध भक्ति गीत व आध्यात्मिक मंत्र निहित है। इस पुस्तक को उनके द्वारा हिन्दी में संपादित किया गया है। इस पुस्तक को वर्ष 2006 में प्रकाशित किया गया है।

वर्ष 2007

  1. औषध दर्शन :– आयुर्वेदिक चिकित्सा पर एक प्रसिद्ध शास्त्र (लेख) ‘औषध दर्शन’ (2007) उनके द्वारा रचित एक अद्वितीय रचना व लोकप्रिय पुस्तक है। इस पुस्तक को 14 विभिन्न भाषाओं में प्रकाशित किया गया है, जिसकी 1करोड़ से भी अधिक प्रतियों का प्रचार किया गया है। इस कृति का संशोधित संस्करण फरवरी, वर्ष 2014 में जारी किया गया है, एवं अब यह नये अद्यतन के साथ उपलब्ध हो गया हैं। यह पुस्तक सरल से जटिल व पुराने रोगों की चिकित्सा के लिए प्राचीन कालीन आयुर्वेदिक औषधियों व लेखक द्वारा स्वतःनिर्मित औषधियों के चमत्कारी प्रभाव को दर्शाती है। इसके नया संस्करण में अच्छा व स्वस्थ आहार की प्रवृत्तियों व जीवन शैली पर भी जोर दिया गया है।
  2. आयुर्वेदइसके सिद्धान्त दर्शन शास्त्र (अंग्रेजी) एवं आयुर्वेद सिद्धान्त रहस्य (हिन्दी) (द्वितीय संस्करण, 2007):– यह पुस्तक आयुर्वेद के आधारी सिद्धान्तों का इस तरीके से वर्णन करती है कि एक आम आदमी अपने बोध संबन्धी कार्यो में प्राचीन ऋषियों द्वारा उद्धत (उद्वरण) के रुप में अनुशासित ढंग से प्राकृतिक व स्वस्थ जीवन शैली के नेतृत्व के लिए सीख सकता है। यह पुस्तक, औषधियों के रुप में प्रयोग, सही आहार व स्वास्थ जीविका के लिए जीवन शैली का वर्णन करती है, एवं भोजन, जीविका, आचरण व जीवन के अन्य पहलुओं के मामले में क्या करें व क्या ना करें, यह भी दर्शाती है। यह पुस्तक अब 40 भाषाओं से अधिक की भाषाओं में उपलब्ध है।
  3. चिकित्सा विज्ञान के साथ तालमेल में योग (अंग्रेजी) विज्ञान की कसौटी पर योग (हिन्दी) : हिन्दी और अंग्रेजी (वर्ष 2007) दोनों ही भाषाओं में प्रकाशित यह पुस्तक वैज्ञानिक अनुसंधान के आधार पर योग से संबंधित ग्रंथ है। यह पुस्तक योग और चिकित्सा विज्ञान के बीच तालमेल के बारे में विवरण देती है। यह पुस्तक शारीरिक कार्यप्रणाली पर योग, प्राणायाम और ध्यान के प्रभाव पर भी प्रकाश डालती है। यह पुस्तक सभी वैज्ञानिक तथ्यों और प्रमाणों के साथ आधुनिक चिकित्सा विज्ञान के मापदंडों के अनुसार योग के प्रभाव के परिणाम की व्याख्या करती है।

वर्ष 2008

  1. स्वस्थ जीविका के लिए भारतीय (अंग्रेजी) जड़ीबूटी रहस्य :– हिन्दी और अंग्रेजी (वर्ष 2008) दोनों में प्रकाशित यह पुस्तक, आम जनता द्वारा प्रशंसित और सराही गयी एक बहुत ही उपयोगी पुस्तक है। इस पुस्तक में 700 से अधिक रोगों तथा उनके उपचारों की पद्धति के साथ-साथ 500 औषधीय पादपों के रहस्यों को भी शामिल किया गया है। यह पुस्तक शास्त्रीय औषधीय उपयोगों  के विवरण, स्वअनुभूत उपयोगों और उनके पारंपरिक  उपयोगों को बताती है। इस पुस्तक में औषधि के रूप में पादपों की उपयोगिता के लिए न केवल अच्छे स्वास्थ्य से लोगों को लाभान्वित किया है अपितु, जड़ी-बूटी आधारित औषधि के उपयोग के लिए  और औषधीय पादपों के संरक्षण के लिए भी जागरूकता को विकसित किया है। जनता की मांग के अनुसार, और भी संस्करण, नये पादपों और अतिरिक्त जानकारी के साथ  प्रकाशन-कार्य के अधीन है। हालांकि, इस पुस्तक का हिन्दी संस्करण कोचीन में आयुष विभाग द्वारा आयोजित एवं अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन और आयुर्वेदिक शिखर सम्मेलन में फरवरी, वर्ष 2014 में तीन खंडों में जारी किया गया है तथापि  नया अंग्रेजी संस्करण अभी प्रकाशन के अधीन है।

वर्ष 2009

(8) चार वेद :– वेद का अर्थ है ‘ज्ञान’, और वे दुनिया के धार्मिक और सबसे प्राचीन ग्रन्थ हैं। वे पृथ्वी के धरातल पर उपलब्ध सबसे पुराना लेखन हैं और जीवन के सभी आयामों का वर्णन करता हैं। वे विकास, धर्म, संस्कृति, रीति-रिवाज, परंपरा, विज्ञान, कला और सभी क्षेत्रों से संबंधित जीवन के सभी पहलुओं पर ज्ञान प्रदान करता है। चार वेद अर्थात ऋग्वेद, सामवेद, यजुर्वेद और अथर्ववेद। इन चार वेदों का संपादन और आधुनिक समाज में लुप्त हो चुकी वैदिक संस्कृति की जागृति के लिए आचार्य बालकृष्ण ने उनको उनके मूल रूप (संस्कृत) में प्रकाशित किया है।

वर्ष 2010

योग शिक्षा पर पुस्तकें :– योग के इतिहास में पहली बार, योग गतिविधियों को बच्चों, अध्यापकों, सामान्य आदमी के लिए विद्यालय के पाठ्यक्रम (कक्षा I से VI तक) का हिस्सा बनने के लिए व आम जनता के लिए पुस्तिकाओं व योग मापांक (मापदंड) को समझने के लिए सरल, स्पष्ट व आसान तरीकों में प्रकाशित किया गया है। यह पुस्तक शिक्षा में योग विज्ञान को स्थापित करने की अवधारणा के साथ वर्ष 2010 में हिन्दी व अंग्रेजी दोनों में एक श्रृंखला (क्रम) में प्रकाशित किया गया।

अब यह श्रृंखला असमी, गुजराती, उडि‌या, मराठी, पंजाबी व नेपाली जैसी विभिन्न भाषाओं में प्रकाशित की गर्इ है। यह पूरी तरह से एक नर्इ अवधारणा है जहाँ योग पर पुस्तकों व मापांक (मापदंडो) का ये पाठ्यक्रम विश्व स्वास्थ्य संगठन व एनसीर्इआरटी द्वारा निर्धारित नियमावली को ध्यान में रखकर तैयार किया है।

  1. योगखेल शिक्षण (अंग्रेजी) एवं खेलखेल में योग :– (हिन्दी, असमी, बंगाली, उडि‌या, मलयालम, मराठी, पंजाबी, नेपाली, तेलुगू, अंग्रेजी, गुजारती) यह प्रथम और द्वितीय वर्ग के विद्यार्थियों के लिए योग शिक्षा पर आधारित पाठ्य पुस्तक है।
  2. 10. आओं योग सीखें (अंग्रेजी) एवं आओं सीखें योग (हिन्दी, असमी, बंगाली, उडि‌या, मलयालम, मराठी, पंजाबी, नेपाली, तेलुगू, अंग्रेजी, गुजराती): यह कक्षा III के विद्यार्थियों के लिए योग शिक्षा के प्रति एक पाठ्य पुस्तक है।
  3. आओं योग सीखें (अंग्रेजी) एवं आओं सीखें योग (हिन्दी, असमी, बंगाली, उडि‌या, मलयालम, मराठी, पंजाबी, नेपाली, तेलुगू, अंग्रेजी, गुजराती): यह कक्षा IV के विद्यार्थियों के लिए योग शिक्षा के प्रति एक पाठ्य पुस्तक है।
  1. आओं योग सीखें (अंग्रेजी) एवं आओं सीखें योग (हिन्दी, असमी, बंगाली, उडि‌या, मलयालम, मराठी, पंजाबी, नेपाली, तेलुगू, अंग्रेजी, गुजराती): यह कक्षा V के विद्यार्थियों के लिए योग शिक्षा के प्रति एक पाठ्य पुस्तक है।
  2. आओं योग सीखें (अंग्रेजी) एवं आओं सीखें योग (हिन्दी, असमी, बंगाली, उडि‌या, मलयालम, मराठी, पंजाबी, नेपाली, तेलुगू, अंग्रेजी, गुजराती):यह कक्षा VI के विद्यार्थियों के लिए योग शिक्षा के प्रति एक पाठ्य पुस्तक है।
  3. योग नियमावली (अंग्रेजी, हिन्दी, असमी, बंगाली, उडि‌या, मलयालम, मराठी, पंजाबी, नेपाली, तेलुगू, अंग्रेजी, गुजराती):- यह माता-पिता एवं योग अध्यापकों के लिए एक पाठ्य-पुस्तक है।
  4. वैदिक नित्य कर्म विधिः- वैदिक हिंदू परंपरा में वर्णित दैनिक प्रार्थना, हवन, परिशोधक अनुष्ठानों के तरीकों और यज्ञ विधियों का समावेश करने वाली यह पुस्तक वर्ष 2010 में आचार्य बालकृष्ण द्वारा संकलित और संपादित है।
  5. वैदिक वीर गर्जना :- वर्ष 2010 में आचार्य बालकृष्ण द्वारा संकलित और संपादित यह पुस्तक; प्रेरणादायक, ऊर्जावान और प्रेरक वैदिक मंत्रों का संकलन है।

वर्ष 2012

  1. अष्टवर्ग पादपों का रहस्य (जीवन शक्ति व आर्युवृद्धि विरोधी के लिए) व अष्टवर्ग रहस्य :यह पुस्तक ‘जीवन-शक्ति वर्धक अष्टवर्ग पादपों (जीवनशक्ति व आर्युवृद्धि विरोधी)’ का नया संशोधित संस्करण हैं एवं इसे वर्ष 2012 (हिन्दी व अंग्रेजी दोनों में) प्रकाशित किया गया है। यह पुस्तक आयुर्वेदिक प्रयोगों की विस्तृत श्रंखला के आठ दुलर्भ व विलुप्त प्रायः पादपों पर उत्पत्ति, ऐतिहासिक तथ्यों, विवरण, पहचान व जानकारी देती है।

वर्ष 2013

  1. आयुर्वेद के विज्ञान के लिए एक व्यवहारिक दृष्टिकोण (अंग्रेजी) व आयुर्वेद सिद्धान्त रहस्य (हिन्दी):– यह पुस्तक ‘आयुर्वेद-इसके सिद्धान्त एवं दर्शन शास्त्र’ का संशोधित संस्करण है और वर्ष 2013 (दोनों हिन्दी और अंग्रेजी) में प्रकाशित की गर्इ थी। इस पुस्तक में आसान और सहज भाषा में, विश्व के सर्वाधिक प्राचीन औषधतन्त्र ‘आयुर्वेद’ को नये वैज्ञानिक दृष्टिकोण और मौलिक चित्रों के साथ स्पष्ट किया गया है। यह पुस्तक विभिन्न वैज्ञानिक तथ्यों और सार्वभौमिक सिद्धान्तों को शामिल करती है जो कि शरीर और मन के बीच संतुलन स्थापित करने और एक रोगमुक्त जीवन जीने के लिए आवश्यक है। यह पुस्तक दर्शाती है कि आयुर्वेद के प्राचीन ज्ञान को रोजमर्रा के जीवन पर कैसे शामिल किया जा सकता है।  एक उत्तम स्वास्थ्य संदर्भ पुस्तक है जो दुनिया भर में स्वास्थ्य देखभाल प्रणाली की अवधारणा में क्रांतिकारी बदलाव लाएगी।
  2. विचार क्रान्ति :- यह पुस्तक वर्ष 2013 में नेपाली भाषा में प्रकाशित की गयी थी। इसमे जीवन, समाज, देश और दुनिया में सकारात्मक परिवर्तन लाने हेतु सूत्र शामिल है।
  3. विश्व हर्बल विश्वकोश की शब्दावली (शब्दकोश) :- वर्ष 2013 में जारी इस पुस्तक में दुनिया की लगभग सभी भाषाओं में औषधीय पादपों के स्थानीय भाषा के नाम शामिल हैं। इस पुस्तक को दो खंडों में प्रकाशित किया गया था और यह 125 से अधिक भाषाओं में 10,000 औषधीय पादपों के स्थानीय भाषा के नामों (लगभग 1.5 लाख स्थानीय नाम) का एक व्यापक और अनूठा संग्रह है।

वर्ष 2013-2014

अप्रकाशित प्राचीन संस्कृत पांडुलिपियों ग्रन्थों का प्रकाशन :– आयुर्वेदिक चिकित्सा प्रणाली प्राचीन होने के बावजूद  वैज्ञानिक भी है। ये पांडुलिपियाँ न केवल भारत में अपितु दुनिया भर के विभिन्न पुस्तकालयों और संस्थाओं में उपलब्ध हैं जो मानव जाति के लिए उपयोगी है, तथापि आज तक प्रकाशित नहीं की गयी थी। इस के लिए आचार्य बालकृष्ण द्वारा  आयुर्वेदिक परंपरा की पुनः स्थापना करने और प्राचीन हस्तलिखित पाण्डुलिपियों के खोयें हुए ज्ञान को प्रकाशित करने के लिए विशेष प्रयास किया गया। इन जटिल संस्कृत पांडुलिपियों का सरल हिंदी में अनुवाद और विवरण कुशलतापूर्वक ‘पतंजलि विश्वविद्यालय’ के प्रकाशन योजना के तहत किया गया है। इन पुस्तिकाओं में से 9 पुस्तके आज तक प्रकाशित की जा चुकी हैं, वे हैं:-

  1. आयुर्वेद महोदधि (सुशोदा-निघन्टू):-इस पुस्तक का अगस्त, वर्ष 2013 में विमोचन किया गया था। यह पादपों के औषधीय गुणों व इनके लक्षणों के बारें में वर्णन करती है।
  2. अजीर्णअमृतमंजरी :- इस पुस्तक को अगस्त, वर्ष 2013 में विमोचन किया गया था। यह उदरीय विकारों के प्रकार व इनके अद्वितीय उपचारों के बारे में वर्णन करती है।
  3. भोजन कुतुहलमः- इस पुस्तक का अगस्त 2013 में विमोचन किया गया। यह पुस्तक भोजन की किस्म व इसके गुणों के साथ समझौता करती है।
  4. सिद्धसार संहिता :- इस पुस्तक का अगस्त 2014 में विमोचन किया गया। यह पुस्तक औषधि गुणों व उनके लक्षणों के साथ-साथ संक्षिप्त में आयुर्वेद की आठ शाखाओं के बारे में वर्णन करती है।
  5. योगशतम :- इस पुस्तक का अगस्त 2014 में विमोचन किया गया। यह पुस्तक विभिन्न विकारों के लिए सैकड़ों अद्वितीय निरुपण (सूत्रण) का वर्णन करती है।
  6. अष्टांगहृदयम :- इस पुस्तक का अगस्त 2014 में विमोचन किया गया। यह पुस्तक आयुर्वेद विद्यार्थियों की बेहतर समझ के लिए सरलीकृत तरीकों में व आसान भाषाओं में प्रकाशित की गर्इ।
  7. रुचिवधूगलरत्नमाला :- इस पुस्तक का अगस्त 2014 में विमोचन किया गया। यह पुस्तक आयुर्वेद विद्यार्थियों की बेहतर समझ के लिए सरलीकृत तरीकों में व आसान भाषाओं में प्रकाशित की गर्इ।

वर्ष 2015

  1. दैनिक योगभायाष्क्रम :- इस पुस्तक का वर्ष 2015 में विमोचन किया गया। इस पुस्तक का नेपाली व अंग्रेजी में अनुवाद किया गया है।
  2. अनुसंधान / शोध प्रकाशन :- इस पुस्तक में पतंजलि योगपीठ द्वारा किये गये सभी शोध कार्य निहित है।

आगामी प्रकाशन :-

शीघ्र ही लेखक की ‘विश्व हर्बल विश्वकोश’ उम्मीद की एक सबसे बड़ी स्वप्न परियोजना (ड्रीम प्रोजेक्ट) आने वाली है।

‘विश्व हर्बल विश्वकोश’ इस पुस्तक का प्रकाशन अपेक्षित वर्ष 2020 तक आने के अधीन है।’ वर्ल्ड हर्बल विश्वकोश सभी औषधीय पादपों के बिखरे हुए ज्ञान को एकत्र करने तथा उनके उपयोग को एक ही स्थान पर लाने का एक अनूठा प्रयास है। यह दुनिया भर में विभिन्न पारंपरिक औषधीय प्रणालियों में इस्तेमाल सभी औषधीय पादपों की एक बहु-स्थूल, संपूर्ण संग्रह है। यह पुस्तक दुनिया के लगभग सभी अज्ञात औषधीय पादपों में जानकारी देगी जो एक ही स्थान पर कहीं भी उपलब्ध नहीं थे और भविष्य में वैज्ञानिक दृष्टि से विभिन्न बीमारियों के लिए उपयोग की जा सकती हैं। इन पादपों को आधुनिक वैज्ञानिक प्रयोगों के लिए पारंपरिक उपयोगों की दृष्टि से और उनके शास्त्रीय चित्र के साथ अलंकृत कर समझाया गया है। यह अनूठी रचना, प्राचीन काल से लेकर अब तक के ज्ञात सभी साधारण रोगों की उचित उपचार पद्धति को उद्घाटित करती है। इस पुस्तक में लगभग 550,000 स्थानीय नामों का उल्लेख है तथा विश्व के लगभग 60,000 औषधीय पादपों को विश्व की 225 भाषाओं के पर्याय शब्दों में उल्लेखित किया गया है। इसके अलावा, दुनिया के विभिन्न क्षेत्रों में पादपों के सभी सामान्य नाम, और प्राचीन आयुर्वेदिक प्रकाशित गंरथों और अप्रकाशित पांडुलिपियों में पाए गए 900 औषधीय पादपों के 13,000 से अधिक संस्कृत नाम भी संकलित कर रहे हैं। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि यह पहला ग्रंथ है, जहां कुल स्तर से लेकर वंश और प्रजाति के स्तर तक, दुनिया के लगभग 60,000 औषधीय पादपों का पूर्णतः नया संस्कृत नामकरण किया गया है, जोकि  वैज्ञानिक दृष्टि से नामकरण की उत्पत्ति के आधार की व्याख्या करेगा। यह पुस्तक अलग-अलग कुल और वंश के नाम की उत्पत्ति के बारे में भी बताती है। साथ ही, यह पुस्तक पादपों की बाहरी विशेषताएं (आकृति विज्ञान), औषधीय अध्ययन, रासायनिक संघटक, पादपों, विषाक्तता प्रभाव और संबंधित क्षेत्रों में आधुनिक शोध के साथ-साथ दुनिया भर में लोकप्रिय विभिन्न औषधीय उपयोग व औषधीय गुण भी शामिल करती है। परिणामतः किसी भी पादपों की पहचान करने के साथ-साथ उसकी उपस्थिति और गुणों के बारे में पता करना भी आसान हो जाएगा। यह प्रमाण पर आधारित अनुसंधान के साथ, परंपरागत जड़ी-बूटी चिकित्सा प्रणाली और आधुनिक उपयोगों का एक अनूठा मिश्रण है। यह जड़ी-बूटी चिकित्सा पर पहली पुस्तक है जहाँ वनस्पति जगत के सभी समूहों के औषधीय पादपों का वर्णन मिलेगा जैसे कि जलीय और समुद्र पौधें (शैवाल), कवक, ब्रायोफाइट्स, टेरिडोफाइट, जिम्नोस्पर्म और ऐन्जिओस्पमर्स । इसमें औषधीय पादपों की लगभग 60,000 सजीव चित्रकारी (चित्रफलक चित्रकारी) को सम्मिलित किया गया है, जो एक अविश्वसनीय प्रयास है, ऐसे बहुत ही कम हर्बल कार्य हुए है जहाँ पहचान के आधार के  रूप में पादपों के चित्रों का प्रदर्शन  है। फोटो और रेखा चित्र को भी सम्मिलित किया गया है जो इन पादपों की एक स्पष्ट प्रदर्शनी प्रस्तुत करता है। यह पुस्तक दुनिया की पारंपरिक औषधीय प्रणाली तथा वर्तमान युग की पारंपरिक चिकित्सा में उनकी स्थिति को स्पष्ट करती है। इस विश्वकोष का एक वेब-पोर्टल भी शीघ्र ही प्रस्तुत किया जायेगा। वस्तुतः यह विश्वकोष दुनिया  के औषधीय पादपों पर सबसे वर्णनात्मक और वास्तविक कार्य को प्रस्तुत करेगा। पुस्तक वैश्विक स्तर पर सभी पाठकों के लिए जानकारी का एक अच्छा स्रोत होगा। यह वनवासी (जनजाति), ग्रामीण और शहरी जन डॉक्टरों के लिए और समाज के सभी समुदायों के लिए एक वरदान साबित होगा। इस कार्य से औषधीय पादपों और उनके उपयोग का अध्ययन करने के लिए उत्सुक विभिन्न क्षेत्रों से विद्यार्थियों, शोधकर्ताओं और विद्ववानों के ज्ञान में वृद्धि होगी।

वैश्विक समागम :

  1. ताइवान आयुर्वेदिक औषधियों के निर्माण में सबसे अच्छी प्रौद्योयोगिकी प्राप्त करने के लिए।
  2. चीन चीनी पारंपरिक चिकित्सा एवं प्रौद्योयोगिकी की प्रणाली का अन्वेषण करने के लिए।
  3. सिंगापुर हर्बल उद्यान की तकनीक का अन्वेषण करने के लिए।
  4. 4. ब्रिटेन योग शिविरों के लिए और संगठन के माध्यम से आम लोगों के लाभ के लिए स्थापित विश्वास और नियोजन योजनाओं के लिए। इसके लिए विभिन्न संगठन के सदस्यों और योग शिक्षकों के साथ कर्इ वनस्पति उद्योग और आयोजित बैठकों का दौरा किया।
  5. 5. थार्इलैंड हर्बल उद्यान और योग शिविरों के लिए दौरा करने के लिए।
  6. संयुक्त राज्य अमेरिका योग और आयुर्वेद को बढ़ावा देने की बैठक, ह्यूस्टन में केंद्र खोलने और वनस्पतिक उद्यान, औषधीय पादपों, आदि का ज्ञान प्राप्त करने के लिए विभिन्न क्षेत्रों का दौरा किया।
  7. इंडोनेशिया योग शिविर, हर्बल पादपों का ज्ञान कार्यक्रम और सांस्कृतिक कार्यक्रम।
  8. केन्या योग शिविर, हर्बल पादपों का ज्ञान कार्यक्रम और सांस्कृतिक कार्यक्रम।
  9. युगांडा योग शिविर, हर्बल पादपों का ज्ञान कार्यक्रम और सांस्कृतिक कार्यक्रम।
  10. तंजानिया योग शिविर, हर्बल पादपों का ज्ञान कार्यक्रम और सांस्कृतिक कार्यक्रम।
  11. दक्षिण अफ्रीका योग शिविर, हर्बल पादपों का ज्ञान कार्यक्रम और सांस्कृतिक कार्यक्रम।
  12. जापानः योग और आयुर्वेद को बढ़ावा देने के लिए शिविर और भारत-जापान संस्कृति कार्यक्रम।
  13. नेपाल योग और आयुर्वेद को बढ़ावा देने के लिए शिविर, ट्रस्ट की गतिविधियां, हर्बल पादपों का ज्ञान कार्यक्रम और सांस्कृतिक कार्यक्रम।
  14. संयुक्त अरब अमीरात (यू..र्इ.): आयुर्वेद और स्वास्थ्य संवर्धन के लिए योग शिविर और सरकारी अधिकारियों से भी मुलाकात की। जड़ी-बूटी की खोज करने के लिए रेगिस्तान का भी भ्रमण किया।
  15. जर्मनीः बायो गैस प्रौदयोगिकी के लिए यात्रा तथा भारत में भी स्थापित करने के लिए सर्वेक्षण। उसी के लिए बैठकों का संचालन। हर्बल उद्यान, वनस्पतिक उद्यान की स्थापना के लिए योजना आदि।
  16. स्पेन संवेष्टन मशीन के लिए दौरा किया। बार्सिलोना में हर्बल और वनस्पतिक गार्डन का दौरा।
  17. मॉरीशस योग शिविर, ट्रस्ट की स्थापना करने के लिए । योग और आयुर्वेद प्रोन्नति के लिए, MBC (मॉरीशस प्रसारण निगम) के लिए हर्बल कार्यक्रम का आयोजन।
  18. कनाडा वैंकूवर में हृदय रोग सम्मेलन, योग संवर्धन और हर्बल गार्डन का दौरा।
  19. ब्राजील लुप्त हर्बल पादपों की खोज, योग शिविर और संगोष्ठियों के लिए।
  20. मैडागास्कर हर्बल खेती और जैविक खेती के कार्यक्रम के लिए।