स्वामी मुक्तानंद जी

दिव्य योग मंदिर (ट्रस्ट) एवं पतंजलि योगपीठ (ट्रस्ट) के स्तम्भ स्वामी मुक्तानंद जी का जन्म पश्चिम बंगाल में जुलार्इ, वर्ष 1956 में हुआ था। स्वामी मुक्तानंद, पतंजलि muktanand_ji_imgयोगपीठ (ट्रस्ट) के निधि व संस्थापक ट्रस्टी है। वे दिव्य योग मंदिर (ट्रस्ट)की सभी गतिविधियों के साथ पूर्णरुप से संबद्ध है। वे विषय में उच्च प्रवीणता (दक्षता) की योग्यता के साथ संस्कृत के विद्वान है। वे संस्कृत में स्नाकोत्तर व गणित के साथ विज्ञान में स्नातक है। उन्होंने संस्कृत के क्षेत्र में प्रसिद्ध गुरु (व्यक्तित्व), आचार्य बलदेव के योग्य मार्गदर्शन के तहत प्रतिष्ठित संस्कृत गुरुकुल काल्वा (हरियाणा) मं अपनी संस्कृत की स्नाकोत्तर एवं स्नातक कक्षाओं में शिक्षण कार्य किया। वे शैक्षिक संस्थानों की कार्यप्रणाली से अच्छी तरह से दक्ष (सुप्रवीण) है।

वर्तमान में वेदों, अन्य संस्कृत ग्रन्थों व हिन्दु धार्मिक सन्त व अन्य विद्वानों के लिए व्याकरण को दैनिक (प्रतिदिन) सिखाते है। उनके अध्यात्मवाद में उत्सुकतापूर्ण रुचि है। वे स्वामी रामदेव जी महाराज के पुराने व निकटतम सहभागी (सहयोगी) है। वे नेस्तिक ब्रह्मचारी (हिन्दु धार्मिक सन्त) है। उन्होने जड़ी-बूटियों की पहचान के लिए उत्तराखण्ड व हिमाचल प्रदेश के पहाड़ी पथ मार्गो की यात्रा की है। उन्होंने वर्षो तक अष्टावर्ग की पहचान के लिए अन्वेषण व अनुसंधान के क्षेत्र में भाग लिया।

स्वामी मुक्तानंद जी ने दिव्य योग मंदिर (ट्रस्ट) की एक इकार्इ दिव्य फार्मेसी में औषधियों के उत्पादन में सक्रिय रुप से भाग लिया। उन्हें च्यवनप्राश व अमृतरसायन को बनाने (तैयार करने) के क्षेत्र में विशेषज्ञता हैं। उन्हें औषधियों को बनाने व जड़ी-बूटियों की पहचान में पन्द्रह वर्षो से अधिक वर्षो का अनुभव प्राप्त है।