परम पावन स्वामी रामदेवजी महाराज के साथ प्राणायाम :

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कोर्इ भी विभिन्न प्राणायाम (नियंत्रित श्वास) के अभ्यास के लिए तकनीक को श्रद्धापूर्ण सहायता नहीं कर सकता। जो कि परम पावन स्वामी रामदेव जी महाराज द्वारा विकसित (प्रस्तुत) किया गया एवं भारत में आम जनसमूह के लिए इसका अध्ययन (शिक्षण) किया गया है। परम पावन स्वामी जी द्वारा बहुत ही सरल तरीramdev_ji_imgकों को सिखाया गया है, जिनका कोर्इ भी व्यक्ति बहुत ही आसानी से पालन कर लेता है। शैली में यह एक सहजता है कि प्राणायाम आम आदमी के जीवन का एक भाग बनता जा रहा है। प्राणायाम लंबे समय तक के लिए पाठ्य पुस्तकों में सम्मिलित था परन्तु भारत में आम (सामान्य) जन समूह में से कोर्इ भी अपनी शैली के प्रति इसे उपयोग में नहीं लाया था। क्योंकि आम जन के अभ्यास के लिए यह बहुत ही जटिल था। वहाँ पर ‘शैली के अभ्यास से कोर्इ भी विचलन (व्यतिक्रम) एक व्यक्ति के लिए अपरिमित नुकसान का कारण होगा’ के रुप में ऐसे निदर्शों से सम्बन्धित सावधानी के कुछ शब्द भी संलग्न थे। इससे एक अवधारणा की उत्पत्ति होती है कि प्राणायाम का व्यक्तिगत रुप से कभी भी प्रयास नहीं किया जाना चाहिए एवं इसका अभ्यास केवल मार्गदर्शक व एक प्रशिक्षित योग शिक्षक की निगरानी में किया जाना चाहिए। इस तरह के कठोर नियम, शैली में अभ्यास से एवं ऊपर की सभी सावधानी में जटिलता होने, शैली में अभ्यास से किसी भी विचलन के होने से व्यक्ति के भारी नुकसान का कारण होगा। प्राणायाम अब तक आम जन समूह से बहुत दूर चला गया हैं एवं अंततः यह लुप्त होकर दफन हो गया था। किसी में भी इस तरह की कला के अभ्यास करने का साहस नहीं था। जो उनके नुकसान (क्षति) का कारण होगा। यहाँ तक कि यदि शैली में अल्प विचलन भी हुआ तो भी क्षति का कारण होगा। परम पावन स्वामी ने प्राणायाम की वजह से हुर्इ क्षति के बारे में आम जन समूह में भय की इस अवधारणा का खंडन करने में अतिवृहत (अद्भुत) कार्य किया है। परम पूज्य स्वामी जी ने प्राणायाम के अभ्यास के लिए बहुत ही सरल तकनीक को प्रकल्पित किया, जो कि दूरदर्शन चैनल (टी.वी.) में देख कर किसी भी आम व्यक्ति द्वारा आसानीपूर्वक किया जा सकता है। परम पूज्य स्वामी ने आम जनसमूह को आश्वस्त किया है कि व्यक्तिगत रुप से अभ्यास के प्रयास में किसी भी व्यक्ति के लिए प्राणायाम क्षति (नुकसान) का कारण कभी नहीं हो सकता। परम पूज्य स्वामीजी ने अंधकार, भय व कुछ एकाधिकार की समाधि (गंभीरता) से प्राणायाम का भारतीय विज्ञान पैतृक द्वारा उत्खनन किया एवं मानव जाति के कल्याण के लिए अपने सरलतम रुप में इसे प्रस्तुत किया। परम पूज्य स्वामी जी ने अंधकार के आवरण को हटाया एवं प्राणायाम के रहस्य को भारत में जन समूह के लिए स्वयं को प्रकाशित किया। कुछ लोग बहुत से विभिन्न रोगों से पीडित हुए एवं कुछ ने मौत को गले लगा लिया था; यद्यपि प्राणायाम के जादू विज्ञान से यह उनके लेखकों के लिए जानने जाने वाली शैली में कुछ पाठ्य पुस्तकों के लिए केवल सीमित रुप में ही अस्तित्व में आया है। उन्होंने सदैव आम जन समूह के कल्याण को निशाना बनाया। परम पूज्य स्वामी रामदेव जी महाराज द्वारा सिखाये जाने के रुप में प्राणायाम के अन्तर्गत अनुक्रम में निम्न आठ श्वासramdev_ji_img1 व्यायाम आते हैः-

  1. भस्त्रिका प्राणायाम
  2. कपालभाति प्राणायाम
  3. बाह्य प्राणायाम
  4. अनुलोम विलोम प्राणायाम
  5. भ्रामरी प्राणायाम
  6. उज्जैयी प्राणायाम
  7. उद्गीठ प्राणायाम
  8. प्रणव प्राणायाम (श्वास पर एकाग्रता)

इसके अलावा उनकी पवित्रता ने विशेष रुप से उन सभी लोगों जो खराब स्वास्थ्य के सहित अनेक कारणों के फलस्वरुप बाह्य प्राणायाम का प्रदर्शन करने में असमर्थ हो, के लिए कपालभाति प्राणयाम के पश्चात अग्निसार की सलाह दी।