स्वामी शंकरदेव जी
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दिव्य योग मंदिर (ट्रस्ट) एवं पतंजलि योगपीठ (ट्रस्ट) के स्तम्भक स्वामी शंकरदेव, दिव्य योग मंदिर(ट्रस्ट)एवं पतंजलि योग पीठ (ट्रस्ट) के संरक्षक व संस्थापक ट्रस्टी हैं। इनका जन्म उत्तराखण्ड के अल्मोड़ा जिला में वर्ष 1930 में हुआ था। वे अपने जीवन की शुरुआत से ही सन्यासी बनने के लिए उत्सुक थे। वे हमेशा साधु व सन्यासियों के सत्संग में भाग लेते थे। वर्ष 1945 में 45 वर्ष की आयु में उन्होंने सन्यासियों के एक समूह के साथ अपना घर त्याग दिया एवं उनके साथ विभिन्न तीर्थो की यात्रा की तथा हरिद्वार पहुँच गये। वे हरिद्वार में महान संत स्वामी कृपालुदेव जी महाराज के अनुबंध में आये। वे हरिद्वार में महान संत स्वामी कृपालुदेव जी महाराज के सरल व निष्कपट शिष्य है। उन्होंने गंगा दशहरा पर वर्ष 1958 में स्वामी इंद्र देव से सन्यास दीक्षा ली।

फरवरी, वर्ष 1968 के बाद से वे विश्व ज्ञान मंदिर [यह कृपाल बाग आश्रम दिव्य योग मंदिर (ट्रस्ट)का पंजीकृत कार्यालय के रुप में विदित है।]में रह रहे है। यह स्वामी कृपालुदेव जी महाराज, जो कि इनके गुरु एवं भारत के स्वतंत्रता संग्राम के सक्रिय कार्यकर्ता है, की तपोस्थली के रुप में बहुत ही पवित्र स्थान है।

स्वामी शंकरदेव जी एक आध्यात्मिक व्यक्तित्व है। ये विश्वभर में विदित योगऋषि स्वामी रामदेव जी महाराज के गुरु हैं। स्वामी रामदेव जी महाराज ने वर्ष 1995 में स्वामीजी से सन्यास दीक्षा ग्रहण की। उन्होंने आश्रम  एवं ट्रस्ट की सभी गतिविधियों में सक्रिय रुप से भाग भी लिया।

पतंजलि योगपीठ :-महर्षि पतंजलि का योगसूत्र, इसके सूत्रों के लिए विदित अष्टांग योग (चरणों की आठ शाखाओं के साथ योग) पर विशिष्ट कृति (लेख) है। जो कि सरल परन्तु गूढ़ (जटिल) एवं व्यापक विषय-वस्तु से मुक्त है। महर्षि पतंजलि ने विश्व के लिये योग के आठ गुना पंथ के माध्यम से समाधि (कब्र)के व्यवहारिक ज्ञान को प्रकटshankar_ji_img1 करने (बतलाने) के लिए अपने लेख लिखे।

पतंजलि योगपीठ-I :-इसका उद्देश्य परम पूज्य स्वामी रामदेव जी महाराज एवं आचार्य बालकृष्ण जी महाराज के सपनों को अमल में लाना है। पतंजलि योगपीठ-I 6 अप्रैल, वर्ष 2006 पर विनिमुक्त (साधिकार)हुआ व इसका यह नाम महान संत महर्षि पतंजलि के पश्चात दिया गया है। यह योग व आयुर्वेद में चिकित्सा विज्ञान एवं अनुसंधान के साथ-साथ औषधीय पादपों व जड़ी-बूटियों के क्षेत्र में इस कार्य का क्रांतिकारी अंश पतंजलि योगपीठ-I से मुख्यतः चलाया जा रहा है। लगभग 20 एकड़ भूमि में फैली इस इकार्इ में बहुसेवाएँ है। इसके आयुर्वेदिक चिकित्सालय में प्रतिदिन छः से दस हजार रोगियों की क्षमता के लिए विश्व की वृहत बहिरंग रोगी विभाग सौ बिस्तरों का अंतरंग रोगी विभाग, पंचकर्म व षटकर्म चिकित्सालय व अनुसंधान केन्द्र आयुर्वेदिक शल्य चिकित्सा व अनुसंधान, नैदानिक व अनुसंधान केन्द्रों (पैथोलॉजी/विकृति विज्ञान, पारजंबु रश्मि/पराध्वनिक चित्रण, एक्स-रे) मानवजाति की सेवा में कार्य कर रहे है। इसके साथ ही इसकी गुणात्मक अनुसंधान गतिविधियाँ, आधुनिक चिकित्सा विज्ञान के मापदण्डों पर योग व आयुर्वेद को परिभाषित करने के लिए अनूठी विशेषताओं में से एक विशेषता है।