वर्तमान की आवश्यकता ‘यज्ञ’

भारतीय संस्कृति में ‘यज्ञ, योग एवं आयुर्वेद’ जैसी अमूल्य विद्याएं एवं विधाएं हैं, जो इस संस्कृति की ‘मुकुटमणि’ है। इतिहास की ओर दृष्टि डालें तो ‘भगवान् श्रीराम, भगवान् श्रीकृष्ण’ से लेकर राजा- महाराजाओं, ग्रामवासियों व अरण्यवासि-ऋषियों की कुटियों तक नित्य व नैमित्तिक यज्ञ का प्रचलन देखने को मिलता है, जो सार्वभौमिक, वैज्ञानिक एवं पंथनिरपेक्ष पावनी परंपरा है।

यज्ञ-महोत्सव

भारतीय ऋषि संस्कृति जिसमे यज्ञ, योग एवं आयुर्वेद जैसी अमूल्य विधाये एवं विद्याये है |


    द्रव्य-यज्ञ, योग-यज्ञ एवं ज्ञान-यज्ञ का त्रिवेणी संगम है "यज्ञ-महोत्सव "


  • द्रव्य-यज्ञ (हवन ):- जिसमे यज्ञ से रोगो की चिकित्सा, वायु आदि पंचतत्वो की शुद्धि, दोष अर्थात ग्रह पितृ श्रापित आदि सभी प्रकार के दोष, दुःख, दरिद्रता एवं अशुभ से मुक्ति पाने के साथ ही सामाजिक, पारिवारिक, शारीरिक, मानसिक व आध्यात्मिक सुख एवं समृद्धि हेतु |
  • योग-यज्ञ:- जिसमे रोगानुसार योगाभ्यास एवं योग विज्ञानं के गूढ़ रहस्यों पर प्रकाश
  • ज्ञान-यज्ञ:- जिसमे वेद, उपनिषद, दर्शन एवं आयुर्वेद आदि जीवन उपयोगी शास्त्रों का स्वाध्याय एवं सत्संग |

  • इस त्रिवेणी संगम "यज्ञ-महोत्सव" को अपने गांव या शहर में आयोजन करने हेतु तुरंत संपर्क करे|